एमपी में 70, 80, 90 परसेंट वेतन का नियम कर्मचारियों पर भारी, काम समान लेकिन वेतन में लाखों का नुकसान
Anjali Dwivedi | Dec 15, 2025, 18:48 IST
Employee
MP में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को कमलनाथ सरकार के 2019 के आदेश से 4 लाख तक का नुकसान हो रहा है। 2 से 3 साल की परिवीक्षा अवधि के कारण वेतन में कटौती हो रही है। कर्मचारीयों ने सीएम डॉ. मोहन यादव से आदेश निरस्त की मांग की है।
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के साथ भेदभाव हो रहा है। कमलनाथ सरकार का छह साल पुराना एक आदेश अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रुला रहा है। 2019 के बाद नियुक्त हुए इन कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के वेतन में सीधा चार लाख रुपए तक का भारी नुकसान हो रहा है। यह आदेश 'काम एक समान, वेतन में भारी असमानता' पैदा कर रहा है।
इस आदेश से एमपी में कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि का वेतन लाखों कम हो गया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया। 12 दिसंबर 2019 को यह आदेश जारी हुआ था। इसमें परिवीक्षा अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल किया गया था। यह नियम केवल कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती होने वालों पर लागू है।
ये खबरें भी पढ़ें...
MP में रोजगार मिशन फेल, 93 परसेंट जिले रोजगार देने के लक्ष्य से पिछड़े, सिर्फ 4 ही सफल
जबलपुर जिला अस्पताल में मरीज के बेड पर घूम रहे चूहे, वायरल वीडियो ने खोली पोल
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से नियुक्त कर्मचारी दो साल में पूर्ण वेतन पाते हैं। जबकि एमपी कर्मचारी चयन मंडल से नियुक्त को तीन साल लगते हैं। पहले साल 70%, दूसरे में 80% और तीसरे साल 90% वेतन मिलता है। 3 वर्ष बाद ही 100% वेतन शुरू होता है।
इस आदेश से हर कर्मचारी को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। 2023 में जो कर्मचारी जनवरी सेवा में आए हैं, उन्हें दिसंबर 2025 तक घाटा होगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 15 हजार 500 के मूल वेतन पर 1 लाख 74 हजार 840 खो रहे हैं। तृतीय श्रेणी के 36 हजार 200 मूल वेतन वाले कर्मचारी को 4 लाख 7 हजार 78 तक का नुकसान हो रहा है।
कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने आदेश निरस्त करने की मांग की है। साथ ही परिवीक्षा अवधि को वापस दो साल करने को कहा है। इससे कर्मचारियों का लाखों का नुकसान कम किया जा सकेगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
भाजपा का समन्वय भोज फार्मूला, पर क्या इससे खत्म होगी पार्टी की गुटबाजी?
बाबा भारती की तरह ठगे गए ग्वालियर के साइंटिस्ट, भरोसा जीत कर ड्राइवर ने लगा दी 16 लाख चपत
इन पॉइंट्स से समझिए पूरा मामला
| |
तीन साल की परिवीक्षा बनी परेशानी
ये खबरें भी पढ़ें...
MP में रोजगार मिशन फेल, 93 परसेंट जिले रोजगार देने के लक्ष्य से पिछड़े, सिर्फ 4 ही सफल
जबलपुर जिला अस्पताल में मरीज के बेड पर घूम रहे चूहे, वायरल वीडियो ने खोली पोल
एमपी में 70,80,90 परसेंट वेतन का नियम क्या है?
एमपी में कर्मचारी वेतन नुकसान ऐसे समझें
सीएम डॉ. मोहन यादव से मदद की गुहार
ये खबरें भी पढ़ें...
भाजपा का समन्वय भोज फार्मूला, पर क्या इससे खत्म होगी पार्टी की गुटबाजी?
बाबा भारती की तरह ठगे गए ग्वालियर के साइंटिस्ट, भरोसा जीत कर ड्राइवर ने लगा दी 16 लाख चपत
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman