मध्यप्रदेश में खाली कुर्सियों पर टिकी व्यवस्था: इमारतें खड़ी, लेकिन कर्मचारियों की कमी से हांफ रहा सरकारी तंत्र
Ramanand Tiwari | Mar 14, 2026, 20:16 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. लगातार बढ़ती आबादी और नई योजनाओं के बीच मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में डेढ़ लाख से ज्यादा पद खाली हैं। स्थिति यह है कि कई जगह 40% तक स्टाफ नहीं है।
News In Short
कई विभागों में 30-40% तक स्टाफ की कमी है।
नए सरकारी भवन बने, लेकिन संसाधनों की कमी बनी है।
वन विभाग में आईएफएस और अन्य पदों की भारी कमी है।
स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।
News In Detail
कई विभागों में अधिकारी और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण सरकारी मशीनरी धीमी पड़ गई है। न योजनाएं समय पर लागू हो पा रही हैं और न ही आम लोगों को सेवाएं समय पर मिल रही हैं।
खाली पदों ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब डेढ़ लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इनमें उच्च प्रशासनिक पदों से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारी शामिल हैं।
इस कमी का सीधा असर सरकारी सेवाओं पर पड़ रहा है। कई विभागों में कामकाज की रफ्तार धीमी है और लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है।
हालात समझिए इन प्रमुख बिंदुओं में...
- प्रदेश के 54 से अधिक सरकारी विभागों में पद रिक्त हैं।
- कई विभागों में 30 से 40 प्रतिशत तक स्टाफ की कमी है।
- लगभग डेढ़ लाख पद सालों से खाली पड़े हुए हैं।
- अस्पतालों में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है।
- कई जगह अधिकारियों की जगह प्रभारियों से काम चल रहा है।
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इमारतें नई, लेकिन काम करने वाले नहीं
वन विभाग में भी अमले की कमी
स्थिति कुछ इस तरह है...
- आईएफएस कैडर के 296 पदों में से 185 ही कार्यरत।
- राज्य वन सेवा के 359 पदों में से 142 ही भरे।
- वनरक्षक, वनपाल, डिप्टी रेंजर और रेंजर के 20,676 पदों में से 5,452 खाली।
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भर्ती के बाद भी है कमी
इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। आरक्षण से जुड़े मामलों के कारण करीब 10 हजार पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं। कई विभागों में पदोन्नति से जुड़े मामले लंबित हैं।
कई क्षेत्रों में वर्षों से नए पद नहीं
मुख्य आंकड़े देखें...
- विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5,443 पद स्वीकृत, लेकिन सिर्फ 1,495 पदस्थ यानी 3,948 पद खाली
- चिकित्सा अधिकारियों के 6,513 पदों में से 2,689 रिक्त
- इसका असर यह है कि प्रदेश के कई अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
- सीजर डिलीवरी की सुविधा अभी भी केवल लगभग 140 सरकारी अस्पतालों में ही मिल पा रही है।
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बढ़ती आबादी, लेकिन पद वही पुराने
पुलिस बल भी जूझ रहा कमी से
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निष्कर्ष:
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