बुलडोजर चलाने पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- बिना नियम पालन मकान तोड़ना, समाचार प्रकाशित कराना फैशन बन गया
Pratibha Rana | Feb 13, 2024, 08:39 IST
हाईकोर्ट इंदौर की तल्ख टिप्पणी
मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए चलन में आई बुलडोजर संस्कृति पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन किए बगैर मकान तोड़ना और इस कार्रवाई का समाचार प्रकाशित करना फैशन बन गया है।
संजय गुप्ता, INDORE. बुलडोजर चलाओ और मकान तोड़ दो, दुकान तोड़ दो( Run bulldozer and demolish the house ), मप्र में शुरू हुई इस कार्रवाई को लेकर अब हाईकोर्ट इंदौर की तल्ख टिप्पणी ( High Court comment running bulldozer )आई है। हाईकोर्ट ने उज्जैन के एक मामले में उन्जैन नगर निगम को पीड़ित पक्ष को एक लाख रुपए देने के आदेश दिए गए हैं, साथ ही टिप्पणी की है कि- नियमों का पालन किए बिना मकान तोड़ना और इस कार्रवाई का समाचार प्रकाशित करना फैशन बन गया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि जैसा कि इस अदालत ने बार-बार देखा है, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बगैर कार्रवाई( Indore HC comment bulldozer culture )करके किसी भी घर को ध्वस्त करना और उसकी खबर मीडिया में प्रकाशित करवाना अब फैशन बन गया है। ऐसा लगता है कि इस मामले में भी याचिकाकर्ताओं के परिवार के सदस्यों में से एक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया और विध्वंस गतिविधि को अंजाम दे दिया गया।
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उज्जैन निवासी( MP News )महिला का मकान नगर निगम ने पिछले दिनों तोड़ा था। महिला ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। निगम के वकील ने कहा- महिला ने दूसरे को मकान बेच दिया था। इसलिए उसे नोटिस जारी कर मकान तोड़ा है। महिला ने नगर निगम की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि उसे कार्रवाई से पहले नोटिस तक जारी नहीं किया गया। नगर निगम का कहना था कि महिला यह मकान किसी परवेज नामक व्यक्ति को बेच चुकी है, इसलिए हमने परवेज को नोटिस जारी कर दिया था।
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कोर्ट ने नगर निगम के वकील से पूछा कि क्या उन्होंने उस परवेज नामक व्यक्ति से मकान खरीदने के दस्तावेज मांगे थे। उन दस्तावेजों की जांच की थी। नगर निगम के वकील ने कोर्ट को बताया कि उस व्यक्ति ने दस्तावेज तो दिखाए लेकिन दिए नहीं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी मकान के बारे में कह देगा कि यह उसने खरीद लिया है और निगम उसे तोड़ देगा। मकान तोड़ने की इतनी जल्दी क्या थी?
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हाईकोर्ट ने कहा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा
हाईकोर्ट ने कहा कि जैसा कि इस अदालत ने बार-बार देखा है, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बगैर कार्रवाई( Indore HC comment bulldozer culture )करके किसी भी घर को ध्वस्त करना और उसकी खबर मीडिया में प्रकाशित करवाना अब फैशन बन गया है। ऐसा लगता है कि इस मामले में भी याचिकाकर्ताओं के परिवार के सदस्यों में से एक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया और विध्वंस गतिविधि को अंजाम दे दिया गया।
#मंदसौर जिले के दलौदा में जिला एवं पुलिस प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
▪️ नाबालिग से छेड़छाड़ एवं मारपीट करने वाले आरोपियों के घरों पर चला #बुलडोजर#JansamparkMP pic.twitter.com/2AMwTT55IV
— Home Department, MP (@mohdept) February 12, 2024
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यह है मामला
उज्जैन निवासी( MP News )महिला का मकान नगर निगम ने पिछले दिनों तोड़ा था। महिला ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। निगम के वकील ने कहा- महिला ने दूसरे को मकान बेच दिया था। इसलिए उसे नोटिस जारी कर मकान तोड़ा है। महिला ने नगर निगम की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि उसे कार्रवाई से पहले नोटिस तक जारी नहीं किया गया। नगर निगम का कहना था कि महिला यह मकान किसी परवेज नामक व्यक्ति को बेच चुकी है, इसलिए हमने परवेज को नोटिस जारी कर दिया था।
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निगम के जवाब पर कोर्ट ने जताई हैरानी
कोर्ट ने नगर निगम के वकील से पूछा कि क्या उन्होंने उस परवेज नामक व्यक्ति से मकान खरीदने के दस्तावेज मांगे थे। उन दस्तावेजों की जांच की थी। नगर निगम के वकील ने कोर्ट को बताया कि उस व्यक्ति ने दस्तावेज तो दिखाए लेकिन दिए नहीं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी मकान के बारे में कह देगा कि यह उसने खरीद लिया है और निगम उसे तोड़ देगा। मकान तोड़ने की इतनी जल्दी क्या थी?
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