एमपी में बदलेंगे नलजल के नियम, पंचायतों को संभालना होगा पूरा सिस्टम
Ramanand Tiwari | Sept 02, 2026, 09:43 IST
mp panchayat water responsibility rule 2026
मध्य प्रदेश के गांवों में नलजल व्यवस्था अब पंचायतों के लिए बड़ी जिम्मेदारी बनने जा रही है। पानी बंद होने, पाइपलाइन खराब होने, बिल वसूली, ऑपरेटर और जल गुणवत्ता से जुड़े सवालों पर स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
ऐसे समझें पूरा मामला
- पानी की सप्लाई बंद हुई तो पंचायत को जवाब देना होगा।
- बिल वसूली और जल शुल्क प्रबंधन की जिम्मेदारी पंचायत संभालेगी।
- पाइपलाइन में खराबी आने पर पंचायत को मरम्मत की व्यवस्था करनी होगी।
- अवैध नल कनेक्शन पर पंचायत को कार्रवाई करनी होगी।
- पीने के पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और निगरानी की जिम्मेदारी भी पंचायत की होगी।
सुविधा मिली, अब जवाबदेही का दबाव भी
मध्यप्रदेश में मप्र पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन) नियम, 2026 लागू हो गए हैं। इन नए नियमों के बाद गांवों में पानी की व्यवस्था को लेकर पंचायतों की भूमिका पहले से ज्यादा अहम हो गई है। अब सुविधा देने के साथ-साथ पंचायतों को व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
नल बंद हुआ तो जिम्मेदारी टालना मुश्किल
अगर पाइपलाइन खराब होती है, कनेक्शन में कोई दिक्कत आती है या पानी की सप्लाई रुकती है, तो पंचायत को जल्द से जल्द व्यवस्था ठीक करानी होगी।
नई व्यवस्था के बाद नलजल योजना के संचालन को लेकर पंचायतों की भूमिका और कामकाज पर ज्यादा नजर रखी जाएगी।
पानी के साथ अब बिल का भी हिसाब
पंचायतें पानी का शुल्क तय करेंगी, उपभोक्ताओं को बिल जारी करेंगी और उसकी वसूली भी करेंगी। अगर कोई उपभोक्ता भुगतान नहीं करता है, तो नियमों के अनुसार कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई भी की जा सकेगी।
यानी पंचायतों की जिम्मेदारी सिर्फ पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें पानी की व्यवस्था और उससे जुड़े पूरे हिसाब-किताब को भी संभालना होगा।
पाइपलाइन टूटी तो इंतजार का बहाना नहीं
नई व्यवस्था में ऐसे मामलों की देखरेख पंचायत के स्तर पर होगी। वॉल्वमैन और पंप ऑपरेटर की नियुक्ति तथा उनके भुगतान की व्यवस्था भी पंचायत करेगी।
छोटी मरम्मत के लिए भी जिम्मेदारी तय
राशि सीमित है, लेकिन इसका उद्देश्य छोटी खराबियों को तत्काल ठीक कराना है। ऐसे में मामूली तकनीकी समस्या लंबे समय तक पानी की सप्लाई रोकती है तो स्थानीय स्तर पर कार्रवाई का सवाल उठेगा।
अवैध कनेक्शन पर पंचायत को लेना होगा एक्शन
पानी की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था से क्षतिपूर्ति की वसूली की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर लागू कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर की कार्रवाई के लिए भी पंचायत कदम उठा सकेगी।
पानी की गुणवत्ता पर भी नजर
इसका मतलब है कि ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में अब सप्लाई, रखरखाव और गुणवत्ता—तीनों मोर्चों पर पंचायत की भूमिका होगी।
सरकार ने जिम्मेदारी नीचे तक पहुंचाई
जल जीवन मिशन के प्रबंध संचालक केवीएस चौधरी के अनुसार, नई व्यवस्था में पंचायत स्तर पर पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं। इससे स्थानीय जरूरत के मुताबिक मरम्मत और पानी की आपूर्ति से जुड़े काम समय पर कराने में मदद मिलेगी।
अब असली परीक्षा पंचायतों की
नल सूखा, पाइपलाइन खराब हुई, पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठा या अवैध कनेक्शन मिला—हर स्थिति में पंचायत की भूमिका सामने होगी।
सुविधा पंचायत के स्तर तक पहुंची है तो अब जवाबदेही (एकल ग्राम नलजल योजना) भी वहीं तक पहुंच गई है।
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