मध्यप्रदेश में तबादला नीति में पक्षपात, कांग्रेस विधायक ने उठाए गंभीर सवाल
Jitendra Shrivastava | May 19, 2025, 19:02 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्यप्रदेश में तबादला नीति पर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने हाल ही में सरकार की तबादला नीति (Transfer Policy) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह नीति पूरी तरह जाति, वोट बैंक और आर्थिक लाभ के आधार पर संचालित हो रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
अभय मिश्रा का कहना है कि सेमरिया क्षेत्र के विधायकों को तबादला नीति की बैठक में जानबूझकर नहीं बुलाया गया जबकि अन्य विधायकों और सांसदों को शामिल किया गया। इसे उन्होंने अपनी उपेक्षा और जनता के अपमान के तौर पर देखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक जनता के प्रतिनिधि होते हैं, किसी राजनीतिक दल के अधीन नहीं।
विधायक अभय मिश्रा ने आरोप लगाया कि तबादला नीति का आधार जाति, वोट बैंक और आर्थिक लेन-देन है। यह नीति पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोसों दूर है। इसका उद्देश्य जनहित नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के हित साधना और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाना है।
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अभय मिश्रा ने बताया कि सेमरिया में पिछले 15 दिनों से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर एक वसूली अभियान चलाया जा रहा है, जो पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
कांग्रेस विधायक ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि तबादला नीति में पूरी पारदर्शिता लाई जाए और भेदभावपूर्ण रवैया बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की तानाशाही रवैया लोकतंत्र के लिए खतरा है और जनप्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है।
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तबादला नीति में पक्षपात और अपमान
जाति और वोट बैंक के आधार पर तबादले
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राजनीतिक बदले की भावना से वसूली
पारदर्शिता की मांग और लोकतंत्र के लिए खतरा
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तबादला नीति में पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम
- स्पष्ट और सार्वजनिक नियम बनाना।
- सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को बैठक में शामिल करना।
- तबादले के फैसलों का कारण लिखित रूप में देना।
- पक्षपात और अनियमितताओं पर सख्त जांच।
- शिकायत निवारण तंत्र का सुदृढ़ीकरण।
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