पुलिस पर बयान गायब करने का आरोप, करोड़ों की संपत्ति में फंसी बुजुर्ग डॉक्टर की जिंदगी

Neel Tiwari | Jan 29, 2026, 20:53 IST
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Dr Hemlata Srivastava
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जबलपुर में रिटायर्ड नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की संपत्ति का विवाद बढ़ गया है। उनकी बहन और जीजा पर गंभीर आरोप हैं। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

News in Short

रिटायर्ड नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का पुलिस को दिया कथित लिखित कथन गायब होने का आरोप।
बहन-जीजा पर जबरन रजिस्ट्री और दान पत्र के जरिए करोड़ों की संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप।
भूखा रखने, प्यास में तीन चम्मच पानी देने और कड़वी चाय पिलाने जैसे अमानवीय व्यवहार के दावे।
बीमारी और बेसुधी का फायदा उठाकर बने फर्जी दान पत्र और रजिस्ट्रियां।
मदन महल थाना प्रभारी धीरज राज ने किसी भी कथन से किया इनकार।

News in Detail

जबलपुर में करोड़ों की संपत्ति रखने वाली एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर के साथ कथित तौर पर सिर्फ रिश्तों ने ही नहीं, बल्कि सिस्टम ने भी विश्वासघात किया।

इस मामले में यह भी सामने आया है कि पुलिस को दिया गया उनका लिखित कथन जांच से गायब कर दिया गया। अब यह मामला पारिवारिक लालच से आगे बढ़कर पुलिस की भूमिका और मानवता दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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हेमलता ने बहन-जीजा पर गंभीर आरोप लगाए

जबलपुर जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का मामला अब संपत्ति विवाद से आगे बढ़ गया है। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर सवाल उठा रहा है।

डॉ. हेमलता ने अपनी बहन और जीजा पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप है कि उनका दिया गया लिखित कथन जांच से गायब कर दिया गया। इस कथन में डॉ. हेमलता ने बताया था कि उनके साथ बेहोशी की हालत में फर्जीवाड़ा किया गया।

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प्रॉपर्टी हड़पने की साजिश रची

डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करोड़ों की संपत्ति उनके लिए संकट बन गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा गया। प्यास लगने पर तीन चम्मच पानी दिया जाता था।

वीडियो में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन आरोप उन्हीं पर थे जिन्होंने उनकी देखरेख की जिम्मेदारी ली थी। उनके थोड़े स्वस्थ होने के बाद एक और वीडियो सामने आया। इसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी संपत्ति किसी को दान नहीं की और न ही रजिस्ट्री कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बीमारी और बेहोशी का फायदा उठाकर उनकी प्रॉपर्टी हड़पने की साजिश रची गई।

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हेमलता के इकलौते बेटे की मौत

इस दर्दनाक कहानी की जड़ें डॉ. हेमलता के व्यक्तिगत जीवन के बड़े नुकसान से जुड़ी हैं। 2022 में उनके इकलौते बेटे की मौत हुई। फिर दिसंबर 2025 में पति महेश कुमार श्रीवास्तव का निधन हुआ। इस तरह, डॉ. हेमलता पूरी तरह अकेली रह गईं।

जनवरी 2026 तक अंतिम संस्कार और धार्मिक प्रक्रियाएं पूरी हुईं। इसके बाद उनकी बहन शांति तिवारी और पति राजेंद्र कृष्ण तिवारी जबलपुर आकर उनके साथ रहने लगे। यहीं से परिस्थितियां बदलने लगीं।

किचन में प्रवेश से रोका गया

डॉ. हेमलता की पिछले 22 वर्षों से सेवा कर रहा परिवार शॉकिंग जानकारी दी है। सेवा करने वाली महिला कविता ने बताया कि बहन-जीजा के आने के बाद उसे किचन में प्रवेश से रोका गया। कहा गया कि अब डॉक्टर परहेज का खाना लेंगी। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। कविता ने बताया कि डॉ. हेमलता को दी जा रही चाय असामान्य रूप से कड़वी थी। कविता ने खुद चाय पी, तो उसे भी कड़वाहट महसूस हुई। इससे मिलावट की आशंका और बढ़ गई।

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रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं

2 जनवरी 2026 को डॉ. हेमलता की 22 हजार स्क्वायर फीट जमीन की रजिस्ट्री डॉ. सुमित जैन और प्राची जैन के नाम की गई। आरोप है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। रजिस्ट्रार की जांच पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद डॉ. सुमित जैन ने पार्टीशन दीवार खड़ी कर कब्जा कर लिया।

वहां मेमोरियल अस्पताल का बोर्ड लगाया गया, जिसमें उनके नाम थे। इसके बाद बहन-जीजा जबलपुर छोड़कर चले गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि वे कम सामान लेकर आए थे, लेकिन ज्यादा बैग लेकर लौटे। यह भी आरोप है कि जब डॉ. श्रीवास्तव अस्पताल में एडमिट होती थीं, तो बहन-जीजा देखभाल करने की बजाय गायब हो जाते थे।

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मदन महल थाने में शिकायत दर्ज

इन घटनाओं के बाद डॉ. हेमलता श्रीवास्तव ने मदन महल थाने में शिकायत दर्ज कराई। 14 जनवरी को पुलिस अधीक्षक को भी शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने लिखा कि उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा और घर का सामान गायब किया जा रहा है। इस दौरान पुलिस ने उनका एक लिखित कथन लिया। इसका मतलब है कि पुलिस को उनके साथ हो रहे फ्रॉड की जानकारी पहले से थी। इसके बाद प्रॉपर्टी के बाकी हिस्से का दानपत्र बना और रजिस्ट्री कर दी गई। हालांकि, यहीं पर पूरा मामला और ज्यादा संदिग्ध हो जाता है।

हेमलता का लिखित कथन जांच फाइल से गायब

'द सूत्र' के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. हेमलता का लिखित कथन अब जांच फाइल से गायब बताया जा रहा है। जब इस संबंध में मदन महल थाना प्रभारी धीरज राज से बात की गई, तो उन्होंने कथन लिए जाने से इनकार कर दिया। थाना प्रभारी का यह बयान पूरे मामले को उलझा देता है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हेमलता फिर गंभीर रूप से बीमार

आरोप है कि माउंट आबू में रहने वाली दूसरी बहन भी जबलपुर पहुंची। दो दिन साथ रहने के बाद डॉ. हेमलता फिर गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। 22 जनवरी 2026 को उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी आरोप है कि उन्हें बीच रास्ते रजिस्ट्री कार्यालय ले जाकर आधी जमीन गायत्री परिवार के नाम कर दी गई। कर्मचारियों और पड़ोसियों के विरोध के बाद यह मामला सामने आया और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

प्रशासनिक निगरानी में हेमलता श्रीवास्तव

फिलहाल, डॉ. हेमलता श्रीवास्तव प्रशासनिक निगरानी में हैं। उनसे केवल डॉक्टर और प्रशासन के लोग मिल सकते हैं। राहत की बात यह है कि उनकी हालत में अब सुधार हो रहा है और वे साफ-साफ बात कर पा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो उन्होंने कोई रजिस्ट्री कराई है और न ही किसी को जमीन दान में दी है।

इस मामले में जबलपुर के डॉक्टरों के संगठन ने SP और कलेक्टर से कार्रवाई की गुहार लगाई है। हालांकि, जबलपुर पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर दोनों मीडिया से बात करने से बचते रहे हैं। पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं, साथ ही रजिस्ट्रार द्वारा की गई संदिग्ध रजिस्ट्री पर प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे मार्मिक स्थिति उन कर्मचारियों की है, जिन्होंने 22 वर्षों तक डॉ. हेमलता की सेवा की। वे अब घर के बाहर खड़े होकर बस यह कह रहे हैं कि मैम जी किसी तरह स्वस्थ हो जाएं और जल्दी घर वापस आ जाएं।



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