फर्जी बीमा-रजिस्ट्रेशन घोटाले की EOW जांच में दोषी, फिर भी गिरफ्तारी से बाहर रोहित खटवानी

Neel Tiwari | Feb 03, 2026, 13:26 IST
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rohit-khatwani fake insurance case investigation
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जबलपुर के खटवानी सेल्स एंड सर्विसेज से जुड़ा फर्जी बीमा और रजिस्ट्रेशन मामला अब गंभीर हो गया है। पहले ये धोखाधड़ी का मामला था, लेकिन अब जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। EOW की जांच में रोहित खटवानी को दोषी पाया गया है।

News in short

  • EOW जांच में फर्जी बीमा और फर्जी रजिस्ट्रेशन का आरोप साबित हो गए हैं।
  • CFSL जांच से ये साबित हुआ कि फर्जी दस्तावेज शोरूम के कंप्यूटर और प्रिंटर से बने थे।
  • जिला अदालत ने दिसंबर 2025 में अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी।
  • संज्ञेय अपराध होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
  • आरोपी रोहित खटवानी सोशल मीडिया पर खुद को "पाक साफ" बता रहा है।

News in Detail

जबलपुर जिला अदालत ने रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी। इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। अब उसकी जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोषी पाए जाने के बाद भी आरोपी कैसे खुलेआम घूम रहा है?

यह मामला तब सामने आया जब किशोर नायडू ने अक्टूबर 2019 में एक दोपहिया गाड़ी खरीदी थी। उन्होंने यह गाड़ी खटवानी सेल्स एंड सर्विसेज, राइट से ली थी। गाड़ी के साथ उसे बीमा, रजिस्ट्रेशन और इनवॉइस के कागज दिए गए थे।

कुछ दिन बाद, सड़क दुर्घटना में किशोर नायडू की मौत हो गई थी। जब परिजनों ने बीमा क्लेम किया, तब उन्हें पता चला कि जो बीमा कागज दिए गए थे, वे फर्जी थे। इसके अलावा, इनवॉइस और रजिस्ट्रेशन की तारीख भी बदल दी गई थी।



EOW की जांच में आरोप सही

मामले की शिकायत पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच की थी। जांच में यह साफ सामने आया कि फर्जीवाड़ा सिर्फ एक व्यक्ति के साथ नहीं हुआ, बल्कि दो अलग-अलग मामलों में एक जैसी धोखाधड़ी की गई है।

EOW ने अपनी जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी है। इसमें यह माना गया कि आगे और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।

CFSL जांच ने खोल दी पोल

खटवानी के सेल्स कंप्यूटर सिस्टम की हार्ड डिस्क को भारत सरकार की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) को भेजा गया था। फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि फर्जी इनवॉइस, बीमा और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज रोहित खटवानी की कंपनी से ही बनाए गए थे। इस मामले में सह-आरोपी अनिरुद्ध प्रताप सिंह के जरिए इन सेल्स इनवॉइस पर हस्ताक्षर किए गए थे।

कोर्ट ने माना- यह Clerical Mistake नहीं, सोची-समझी धोखाधड़ी

EOW की जांच में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह कोई क्लर्कियल मिस्टेक नहीं बल्कि सोच-समझकर किया गया फर्जीवाड़ा है। इसी आधार पर जब रोहित खटवानी ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, तो EOW ने इसका कड़ा विरोध किया था। दिसंबर 2025 में जिला अदालत ने सख्त टिप्पणियों के साथ अग्रिम जमानत खारिज कर दी है।

जिला अदालत से खारिज अग्रिम जमानत की कॉपी



अब हाईकोर्ट में सुनवाई टालने की कोशिश

जिला अदालत से राहत न मिलने के बाद रोहित खटवानी ने 11 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। पहली सुनवाई 7 जनवरी 2025 को हुई थी। इसके बाद 19 जनवरी 2025 को सुनवाई हुई थी। इसमें आरोपी पक्ष ने यह कहकर मामला टालने की कोशिश की कि सीनियर अधिवक्ता किसी अन्य कोर्ट में व्यस्त हैं।

हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश में लिखा कि जब मामला नंबर दो पर लगा हो, तो सुनवाई टालने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। वहीं, अगली तारीख 19 फरवरी तय कर दी गई है।

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संज्ञेय अपराध फिर भी गिरफ्तारी नहीं, सवालों में EOW

यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रोहित खटवानी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही है। संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence)में उसका दोष सिद्ध हो चुका है।

जिला अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत भी खारिज कर दी थी। फिर भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो रही। EOW मामलों के जानकार अधिवक्ताओं का कहना है कि संज्ञेय अपराध में गिरफ्तारी के लिए वारंट की जरूरत नहीं होती।

सोशल मीडिया पर सफाई, कंज्यूमर केस बताकर फैला रहा भ्रम

दूसरी ओर, जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद रोहित खटवानी खुद को पाक साफ बता रहा है। वह सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रहा है और कह रहा है कि उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं। सबसे बड़ी बेशर्मी यह है कि वह अपने स्टाफ के साथ खड़ा होकर दावा कर रहा है कि किसी मामले में उसकी या उसके मैनेजर की कोई भूमिका नहीं है।

रोहित खटवानी सफेद झूठ बोलते हुए कह रहा है कि बीमा कंपनियों के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में मामला लंबित है। जबकि EOW की FIR, CFSL रिपोर्ट और कोर्ट रिकॉर्ड से साफ है कि यह आपराधिक धोखाधड़ी और कूट रचना का मामला है। जिला अदालत के आदेश से यह स्पष्ट है कि रोहित खटवानी ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया है।

EOW बना रसूखदारों की ढाल?

EOW मामलों के जानकार एक वकील ने बताया कि EOW के पास आरोपियों को गिरफ्तार करके रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी कमजोरी का फायदा EOW खुद रसूखदार आरोपियों को दे देती है।

इसके कारण आरोपी खुलेआम घूमते रहते हैं। बार-बार अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते रहते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जब जांच पूरी हो जाने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होती, तो आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच का मतलब क्या रह जाता है।

EOW SP से नहीं मिला पक्ष

इस मामले में thesootr ने EOW के पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने विभागीय कारणों का हवाला देते हुए बाइट देने से इनकार कर दिया है।

आपको बता दें कि ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों में जबलपुर के पुलिस अधीक्षक कभी बाइट नहीं देते। वे हमेशा भोपाल हेड ऑफिस से बात करने का हवाला देते हैं।

रोहित खटवानी का नहीं आया जवाब

इस मामले में thesootr ने रोहित खटवानी का पक्ष लेने की भी कोशिश की। हम उनके रानीताल स्थित खटवानी शोरूम भी पहुंचे, जहां हमें बताया गया कि उनके जनरल मैनेजर सचिन तिवारी इस बारे में जानकारी दे सकते हैं।

सचिन से बात करने पर उसने बताया कि रोहित खटवानी अभी जबलपुर शहर में नहीं हैं। जनरल मैनेजर सचिन ने हमें रोहित खटवानी का नंबर दिया। हमने उस नंबर पर मैसेज भी भेजा और कॉल भी किया, लेकिन उनकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है।

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