सोम डिस्टिलरी केस बन रहा 'नो बेंच केस'! सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही हाईकोर्ट से वापस ली अपील
Neel Tiwari | Mar 16, 2026, 17:50 IST
som distillery
मध्यप्रदेश में सोम डिस्टिलरी केस ने नया मोड़ ले लिया है। कई जजों के अलग होने के बाद कंपनी ने हाईकोर्ट से रिट अपील वापस लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा दिया।
News in Short
- सोम डिस्टिलरी ने हाईकोर्ट से अपनी रिट अपील वापस ली।
- कंपनी ने मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा दिया है।
- जस्टिस विनय सराफ के कारण बेंच सुनवाई नहीं कर सकती थी।
- पहले भी तीन जज इस केस की सुनवाई से अलग हुए थे।
- मामला आबकारी विभाग द्वारा लाइसेंस निलंबन से जुड़ा है।
News in Detail
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की वजह से सोम डिस्टिलरी ने हाईकोर्ट से अपील वापस ले ली गई। अगर अपील वापस नहीं ली जाती तो यह ऐसा दुर्लभ मामला बन सकता था जिसकी सुनवाई कई जजों के साथ ही चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच के सामने भी संभव नहीं रहती।
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हाईकोर्ट से वापस ली गई अपील
सुनवाई के दौरान सोम डिस्टिलरी पक्ष ने जानकारी दी। अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कोर्ट को स्थिति बताई। मामला सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट से आदेश भी जारी हुआ है। आदेश अभी वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ। स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन बताया गया। हाईकोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया। कंपनी ने अपनी रिट अपील वापस ले ली।
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इसलिए नहीं हो सकती थी सुनवाई
इसी वजह से चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच में यह मामला आते ही स्पष्ट हो गया कि इस बेंच में इसकी सुनवाई संभव नहीं है। इसे ऐसी बेंच के सामने सूचीबद्ध करना होगा जिसमें जस्टिस विनय सराफ सदस्य न हों।
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पहले ही तीन जज नहीं कर सकते थे सुनवाई
इसके बाद जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट भी बिना कारण बताए खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर चुके थे। बाद में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार किया। इसी आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर हुई।
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क्या है पूरा विवाद
विभाग ने वर्ष 2023 के मामले को आधार बनाया। नकली परमिट से अवैध शराब परिवहन हुआ था। मामले में कंपनी के कर्मचारी दोषी पाए गए। सत्र अदालत ने कर्मचारियों को सजा सुनाई। कार्रवाई को चुनौती देकर कंपनी हाईकोर्ट पहुंची। कंपनी ने लाइसेंस निलंबन पर रोक मांगी। कंपनी ने निविदा प्रक्रिया पर भी रोक मांगी।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
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