Thesootr Sting: गाड़ी कहीं खरीदो, कहीं बेचो… बस 3 हजार दो और टैक्स में 50% छूट लो

Rahul Dave | Feb 27, 2026, 18:48 IST
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thesootr sting Car
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मध्यप्रदेश सरकार ने विक्रमोत्सव व्यापार मेले में 50% लाइफटाइम मोटरयान टैक्स छूट का ऐलान किया। उद्देश्य था कारोबार बढ़ाना, ग्राहकों को राहत देना और शहर की आर्थिक गतिविधि बढ़ाना। Thesootr के स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है।

मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापार को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन के विक्रमोत्सव व्यापार मेले में गाड़ियों पर 50 प्रतिशत लाइफ टाइम मोटरयान टैक्स छूट का ऐलान किया। मंशा थी कारोबार बढ़े, ग्राहक को राहत मिले और शहर में आर्थिक गतिविधि तेज हो।

लेकिन Thesootr के स्टिंग ऑपरेशन में जो सामने आया, वो चौंकाने वाला है।

  • गाड़ी इंदौर से खरीदो
  • डिलीवरी इंदौर में लो
  • और सिर्फ रजिस्ट्रेशन के लिए उज्जैन जाओ
  • 2500–3000 रुपए दो… और 50% टैक्स छूट पाओ
क्या यही है नियम? या नियमों की आड़ में करोड़ों का खेल?

पहले समझिए – टैक्स छूट के असली नियम क्या कहते हैं?

सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक 50% टैक्स छूट उन्हीं डीलरों/वाहनों को मिल सकती है जो:

  • वैध ट्रेड सर्टिफिकेट रखते हों
  • उज्जैन में शोरूम हो या मेले में स्टॉल लगा हो
  • वाहन रखने का यार्ड उज्जैन में हो
  • अलग से वर्कशॉप उज्जैन में हो
  • बिक्री के बाद RTO प्रतिनिधि की मौजूदगी में वाहन के साथ मालिक का फोटो लिया जाए

यानी साफ है - वाहनों की बि​क्री नियमानुसार हो

- लेकिन जमीनी हकीकत क्या है?

Thesootr की जांच में सामने आया:

  • इंदौर के शोरूम से गाड़ी बुक
  • डिलीवरी भी इंदौर में
  • उज्जैन मेले में सिर्फ स्टॉल
  • उज्जैन में न वर्कशॉप
  • न गोडाउन
  • न स्थायी शोरूम
फिर भी… 50% टैक्स छूट मंजूर!

स्टिंग ऑपरेशन: कैमरे में कैद सच

रिपोर्टर राहुल दवे ने खुद को आम ग्राहक बताकर इंदौर के भंवरकुआं स्थित श्याम टाटा शोरूम में संपर्क किया।

डीलर ने बिना हिचक कहा-
छूट मिल जाएगी… रजिस्ट्रेशन उज्जैन से करवा देंगे।

जब पूछा गया - उज्जैन में आपका शोरूम है?
जवाब - नहीं।

डिलीवरी?
इंदौर से।

रजिस्ट्रेशन?
उज्जैन RTO से।

डीलर ने दावा किया – 150 से ज्यादा गाड़ियां इसी तरीके से बिक चुकी हैं।

Showroom
Showroom


2500- 3000 रुपए का फोटो खेल

डीलरों ने खुलकर बताया

  • 10 लाख तक की गाड़ी पर करीब 2500 रुपए
  • महंगी गाड़ी खरीदने पर 3000 रुपए तक
इस सेवा शुल्क को नाम दिया जाता है, फोटो और भौतिक सत्यापन

लेकिन सवाल ये है।

  • जब गाड़ी उज्जैन मेले में खड़ी ही नहीं
  • मालिक वहां मौजूद नहीं
  • डिलीवरी इंदौर में हो चुकी
  • तो सत्यापन किस बात का?

कितना बड़ा है खेल?

मेला अवधि में 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य।

अगर हर वाहन पर औसतन 2500 रुपए भी वसूले जाएं तो

50,000 × 2500 = 12.5 करोड़ रुपए

और अगर औसत 3000 माना जाए तो

15 करोड़ रुपए से ज्यादा



सूत्रों का दावा है कि यह आंकड़ा 20 करोड़ तक पहुंच सकता है।

ujjan
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सबसे बड़ा सवाल, उज्जैन RTO की भूमिका

रिपोर्टर: उज्जैन व्यापार मेले में अभी तक कितनी गाड़ियां बिकी हैं?

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): 6 हजार से ज्यादा गाड़ियां।

रिपोर्टर: उज्जैन मेले में कई ऐसे डीलर हैं जिनका वहां न तो शोरूम है, न यार्ड और न ही वर्कशॉप।

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): उज्जैन मेले में उन्हीं डीलरों को अनुमति दी गई है जिनका वहां शोरूम है।

रिपोर्टर: गाड़ियों की डिलीवरी इंदौर से हो रही है और उज्जैन मेले के नाम पर आरटीओ प्रक्रिया कराई जा रही है।

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): मेले में ट्रेड सर्टिफिकेट उन्हीं डीलरों को दिया गया है जिनका वहां शोरूम है।

रिपोर्टर: नियम के अनुसार ट्रेड सर्टिफिकेट उन्हीं डीलरों को दिया जाना चाहिए जिनका शोरूम, वर्कशॉप और यार्ड वहां हो।

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): ऐसा कोई नियम नहीं है। आपने कहा था कि शोरूम वहां नहीं है, जबकि शोरूम है।

रिपोर्टर: आपके ही विभाग के नियम में यह लिखा है।

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): कहां लिखा है?

रिपोर्टर: आपको नियम भेज दिया है।

संतोष मालवीय (उज्जैन आरटीओ): आप पढ़कर बताइए उसमें क्या लिखा है।

रिपोर्टर: आप पढ़ लीजिए, नियम आपको भेज दिया है।

thesootr sting
thesootr sting


क्या कहता है ट्रेड सर्टिफिकेट का फार्म 16

ट्रेड सर्टिफिकेट लेने के लिए डीलर को फार्म 16 में आवेदन करना होता है उसमें ये बताना होता ​है कि उसके पास इस जगह पर शोरुम है, इस जगह पर वर्कशॉप है और इस जगह पर गोडाउन है। पूरी जानकारी देने के बाद ही ट्रेड सर्टिफिकेट जारी होता है। लेकिन उज्जैन आरटीओ को अपने ही विभाग के ट्रेड सर्टिफिकेट के फार्म 16 की जानकारी नहीं है। इसलिए वो कह रहे हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है।

Form 16
Form 16


सरकार की मंशा खजाना बचाने की

मुख्य सचिव अनुराग जैन और वित्त विभाग के एसीएस मनीष रस्तोगी 10 लाख से कम कीमत वाली गाड़ियों पर छूट सीमित रखने के पक्ष में थे। दरअसल सरकार की मंशा थी कि जिस जिले की छुट है उसे ही लाभ मिले। ऐसा न हो कि जिले के बाहर के या प्रदेश के बाहर के लोग छुट के लिए यहां से वाहन खरीदें। इससे सरकार के खजाने पर अतिरिक्त भार आएगा। दरअसल अफसरों का तर्क था कि महंगी गाड़ियों पर 50% छूट देना राजस्व घाटा है। लेकिन, सिंधिया खेमे के मंत्रियों की जिद के बाद ग्वालियर और उज्जैन मेले में बिकने वाले वाहनों पर 50% छूट देने का निर्णय हो गया।

लेकिन सवाल ये है कि सरकार की मंशा को पलिता लगाकर अब… उसी छूट का फायदा कौन उठा रहा है?

Form 16
Form 16


पूरा खेल सरल भाषा में

सरकार बोली – “उज्जैन में नियमानुसार वाहन टैक्स पर 50 फीसदी छूट दो
डीलर बोले – इंदौर में खरीदो और उज्जैन मेले की छूट का फायदा लो।
RTO का सिस्टम – सेवा शुल्क 2500–3000 दो, बाहर से खरीदे वाहनों पर भी छूट का फायदा लो

ग्राहक खुश – टैक्स आधा।
डीलर खुश – बिक्री ज्यादा।
आरटीओ सिस्टम खुश सेवा शुल्क भरमार
घाटे में रही तो सिर्फ सरकार, आरटीओ सिस्टम ने लगाई करोड़ों के राजस्व की चपत

अब जवाब कौन देगा?

  • क्या हर गाड़ी की असली भौतिक जांच हुई?
  • क्या मेला परिसर में गाड़ियां मौजूद थीं?
  • क्या सिर्फ कागजों पर सत्यापन हुआ?
  • क्या 50% टैक्स छूट का मकसद बदल दिया गया?
Thesootr इस पूरे मामले की परत-दर-परत जांच जारी रखेगा।

क्योंकि सवाल सिर्फ 2500 रुपए का नहीं…
सवाल है नीति बनाम नियत का

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