मानगढ़ धाम पर आदिवासियों का महासम्मेलन, कहा- भील प्रदेश बनवाकर दम लेंगे
Mukesh Sharma | Jul 17, 2026, 17:55 IST
भील प्रदेश की मांग, मानगढ़ धाम पर 10 हजार आदिवासियों का महासम्मेलन
राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पर भील प्रदेश की मांग को लेकर चार राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र) के करीब 10 हजार आदिवासियों का महासम्मेलन हुआ।
समझें क्या है पूरा मामला
- बांसवाड़ा में भील प्रदेश की मांग को लेकर जुटे 10 हजार आदिवासी।
- 4 राज्यों के लोग मानगढ़ धाम पहुंचे, नारे गूंजे- भील प्रदेश बनवाकर दम लेंगे।
- आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप, अलग राज्य की मांग तेज।
- जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए संगठित रहने का आह्वान।
- BAP के नेता भी पहुंचे, लेकिन मांग को राजनीतिक न बताने की अपील।
संगठित रहने का आह्वान
भील प्रदेश की मांग, मानगढ़ धाम पर 10 हजार आदिवासियों का महासम्मेलन
आदिवासी समाज की उपेक्षा
उनका कहना था कि अलग भील प्रदेश बनने पर आदिवासी बहुल क्षेत्रों को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर शासन और विकास को नई दिशा मिल सकेगी। सम्मेलन में आदिवासी समाज के प्रमुख धर्मगुरु एवं विचारक भंवरलाल परमार भी मंच पर पहुंचे। लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मानगढ़ धाम और आसपास के क्षेत्र में जगह-जगह बैरिकेडिंग की है। और पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। आने-जाने वाले मार्गों पर यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए भी पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी निगरानी में खड़े हैं।
भील प्रदेश की मांग, मानगढ़ धाम पर 10 हजार आदिवासियों का महासम्मेलन
क्या है भील प्रदेश की मांग?
भील समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता गोविंद गुरु ने वर्ष 1913 में मानगढ़ नरसंहार के बाद सबसे पहले आदिवासियों के लिये अलग राज्य की मांग उठाई थी। इस नरसंहार को आदिवासी जलियांवाला भी कहा जाता है।
मांग के कारण
संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के तहत पांचवीं अनुसूची के माध्यम से आदिवासी हितों की सुरक्षा जैसे कई उपाय किये गए। लेकिन इनमें से अधिकांश उपाय पूर्णत: लागू नहीं किये जा सके हैं।
भील जनजाति
भील जनजाति, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों में एक आदिवासी जातीय समूह हैं। इसी जनजाति ने अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिये भारतीय ट्राइबल पार्टी का गठन किया था।
हालांकि अब इस पार्टी में भी टूट हो गई है। कुल लोगों ने भारत आदिवासी पार्टी नाम से अलग राजनीतिक दल बना दिया है। अब राजनीतिक पार्टी के रुप में भारत आदिवासी पार्टी की अलग भील प्रदेश के लिए आवाज बुलंद कर रही है।
पांच विधायक व एक सांसद
राजस्थान में पार्टी के चौरासी से अनिल कटारा, आसपुर से उमेश डामोर, धरियावद से थावरचंद डामोर और बागीदौरा से जयकृष्ण पटेल विधायक हैं। जबकि मध्य प्रदेश की सैलाना विधानसभा सीट से कमलेश्वर डोडियार विधायक है।
FAQ
- मानगढ़ धाम का इतिहास और मुख्य घटना क्या है?
17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) को ब्रिटिश सेना और स्थानीय रियासती फौजों ने मानगढ़ पहाड़ी को घेरकर शांतिपूर्ण सभा कर रहे आदिवासियों पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। इस क्रूर नरसंहार में 1,500 से अधिक भील आदिवासियों ने देश और अपने स्वाभिमान के लिए प्राणों की आहुति दी थी। यह घटना अमृतसर के जलियांवाला बाग कांड से लगभग 6 साल पहले हुई थी। - मानगढ़ धाम कहां स्थित है?
यह धाम राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी ब्लॉक के पास, अरावली पर्वत श्रृंखला की एक पहाड़ी पर स्थित है। यह स्थल राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं के बिल्कुल नजदीक स्थित है। यह इन राज्यों के आदिवासी समुदायों की साझा विरासत का प्रतीक है।
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