खुद को बनाए रखने की छटपटाहट या दाग धोने की कोशिश, गहलोत की सियासी पहेली
Mukesh Sharma | Jun 09, 2026, 17:28 IST
Photograph: (the sootr)
आखिर राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत पुराने जख्मों को क्यों कुरेदते रहते हैं? ऐसा क्या कारण रहा कि उन्हें यह कहना पड़ा कि उनके खिलाफ साजिश हुई, उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका गया। आइए समझते हैं कि इस पूरी सियासी पहेली को:
Jaipur: राजस्थान की राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए पूर्व सीएम अशोक गहलोत हमेशा ही शोध का विषय रहे हैं। गहलोत उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनके हर कदम के पीछे कोई न कोई राजनीतिक अर्थ होते हैं।
उनके राजनीतिक कौशल को जानते तो सब हैं, लेकिन समझने वाले बहुत कम हैं। इसलिए यह पहेली है कि आखिर गहलोत बार-बार सार्वजनिक रुप से सचिन पायलट की बगावत की याद क्यों दिलाते हैं? ऐसा क्या कारण है, जो उन्हें इतना परेशान कर रहा है कि उन्होंने दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोकने की साजिश तक के आरोप लगा दिए।
गहलोत 40 साल से राजनीतिक रुप से सक्रिय हैं। वह तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री, तीन बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दो बार एआईसीसी महासचिव जैसे अहम पदों पर रहे हैं।
सचिन पायलट ही वह नेता हैं, जिन्होंने गहलोत को 40 साल में सबसे कड़ी टक्कर दी है। अन्यथा गहलोत ने राजस्थान के बड़े-बड़े नेताओं को राजनीतिक रुप से मात दी है। पूरे राज्य में उनके अपने समर्थक हैं। सामाजिक जीवन के करीब-करीब हर क्षेत्र के व्यक्ति उसने व्यक्तिगत रुप से जुड़े हुए हैं।
कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति के जानकारों के अनुसार केरल और कर्नाटक के घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस में अब बदलाव हो रहे हैं। इस बदलाव से चाहे अशोक गहलोत हों या दिग्विजय सिंह या भूपेंद्र हुड्डा या उनके समकक्ष दूसरे क्षत्रप, सभी प्रभावित होंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि गहलोत को यह पता भी है और वह समझते भी हैं। इसलिए वह बार-बार पार्टी आलाकमान खासकर राहुल गांधी को पायलट की बगावत और अपनी निष्ठा की याद दिलाते रहते हैं।
लेकिन, गहलोत के दामन पर भी 25 सितंबर, 2022 की घटना का दाग है। इसे कांग्रेसी गहलोत का कुर्सी के प्रति मोह और आलाकमान के विरुद्ध बगावत के रुप में याद करते हैं। गहलोत का यह बयान कि यह आलाकमान का नहीं, बल्कि सचिन पायलट को सीएम बनाने का विरोध था। गहलोत की इस बारे में सफाई देना अपने दामन पर लगे बगावत के दाग को धोने की कोशिश है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार गहलोत को लग रहा है कि कांग्रेस के संभावित बदलाव में उनकी कोई भूमिका नहीं रहेगी जबकि पायलट को राजस्थान की कमान मिल सकती है। इसी आशंका के चलते वह बार-बार पायलट की बगावत का जिक्र करके स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
गहलोत बार-बार यह जताते हैं और मानते भी हैं कि राजस्थान में कांग्रेस का अस्तित्व उनके बिना कुछ नहीं है। हालांकि, यह सही है कि गहलोत एक अनुभवी नेता हैं। उन्होंने तीन बार सीएम रहते हुए जनहित के अनेक काम किए हैं। लेकिन, उनका स्वयं को कांग्रेस के भविष्य के लिए अपरिहार्य मानना गलतफहमी है और कुछ नहीं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत का उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोकने की साजिश की बात कहना सही नहीं है। क्योंकि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाना है, यह तो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही हो गया था।
25 सितंबर, 2022 को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के लिए एक लाइन का प्रस्ताव आलाकमान पर छोड़ने की बात भी पहले ही तय हो गई थी। इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रुप में मल्लिकार्जुन खड़गे व अजय माकन का जयपुर आने का कार्यक्रम भी पहले से तय था। गहलोत को यह पूरी जानकारी पहले से थी। पर्यवेक्षकों का अचानक आने की बात कहना गलत है।
अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ सचिन पायलट का मानेसर जाना और कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिश करना और फिर वापस आना सच्चाई है। गहलोत ने यहां तक कह दिया कि 25 सितंबर की घटना के लिए उन्होंने सोनिया गांधी से और सार्वजनिक रुप से भी माफी मांगी थी। लेकिन, पायलट ने तो आज तक कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिश करने के लिए माफी नहीं मांगी है।
पार्टी के एक गुट का मानना है कि इन सबके बावजूद सचिन पायलट का गहलोत के आरोपों पर एक बार भी मुंह नहीं खोलना कई सवाल खड़े करता है। सचिन पायलट को भी यह पता है कि मानेसर की घटना को कांग्रेस आलाकमान भी आसानी से भूलने वाला नहीं है।
पायलट को यह भी पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी किसी भी सूरत में इस बात को भूलने वाले नहीं हैं। इसलिए ही वह कभी भी गहलोत की किसी बात का ना जवाब देते हैं ना ही प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।
वह इस बात से भली भांति वाकिफ हैं कि उनके प्रयास करने से अब कुछ नहीं होने वाला और अब आलाकमान ही उनकी अगली भूमिका तय करेगा। कांग्रेस सूत्रों का यहां तक कहना है कि पायलट की बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वापसी अब संभव नहीं लगती।
कांग्रेस में फेरबदल की आहट के बीच पायलट समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। 11 जून को दिवंगत राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर दौसा के भड़ाना में होने वाली श्रद्धांजलि सभा में पायलट कैंप ने भारी भीड़ जुटाने के लिए ताकत लगा रखी है।
पायलट समर्थक नेताओं को ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने का टारगेट दिए हैं। पायलट कैंप में अशोक गहलोत के हालिया हमले के कारण जबर्दस्त बेचैनी और नाराजगी है। इसलिए उन्होंने 11 जून को शक्ति प्रदर्शन करने की ठान ली है।
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उनके राजनीतिक कौशल को जानते तो सब हैं, लेकिन समझने वाले बहुत कम हैं। इसलिए यह पहेली है कि आखिर गहलोत बार-बार सार्वजनिक रुप से सचिन पायलट की बगावत की याद क्यों दिलाते हैं? ऐसा क्या कारण है, जो उन्हें इतना परेशान कर रहा है कि उन्होंने दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोकने की साजिश तक के आरोप लगा दिए।
40 साल का लंबा राजनीतिक जीवन
सचिन पायलट ही वह नेता हैं, जिन्होंने गहलोत को 40 साल में सबसे कड़ी टक्कर दी है। अन्यथा गहलोत ने राजस्थान के बड़े-बड़े नेताओं को राजनीतिक रुप से मात दी है। पूरे राज्य में उनके अपने समर्थक हैं। सामाजिक जीवन के करीब-करीब हर क्षेत्र के व्यक्ति उसने व्यक्तिगत रुप से जुड़े हुए हैं।
दामन का दाग धोने की कवायद
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि गहलोत को यह पता भी है और वह समझते भी हैं। इसलिए वह बार-बार पार्टी आलाकमान खासकर राहुल गांधी को पायलट की बगावत और अपनी निष्ठा की याद दिलाते रहते हैं।
लेकिन, गहलोत के दामन पर भी 25 सितंबर, 2022 की घटना का दाग है। इसे कांग्रेसी गहलोत का कुर्सी के प्रति मोह और आलाकमान के विरुद्ध बगावत के रुप में याद करते हैं। गहलोत का यह बयान कि यह आलाकमान का नहीं, बल्कि सचिन पायलट को सीएम बनाने का विरोध था। गहलोत की इस बारे में सफाई देना अपने दामन पर लगे बगावत के दाग को धोने की कोशिश है।
प्रासंगिक बने रहे की कोशिश या फिर
गहलोत बार-बार यह जताते हैं और मानते भी हैं कि राजस्थान में कांग्रेस का अस्तित्व उनके बिना कुछ नहीं है। हालांकि, यह सही है कि गहलोत एक अनुभवी नेता हैं। उन्होंने तीन बार सीएम रहते हुए जनहित के अनेक काम किए हैं। लेकिन, उनका स्वयं को कांग्रेस के भविष्य के लिए अपरिहार्य मानना गलतफहमी है और कुछ नहीं।
कांग्रेस अध्यक्ष बनना तो पहले ही तय था
25 सितंबर, 2022 को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के लिए एक लाइन का प्रस्ताव आलाकमान पर छोड़ने की बात भी पहले ही तय हो गई थी। इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रुप में मल्लिकार्जुन खड़गे व अजय माकन का जयपुर आने का कार्यक्रम भी पहले से तय था। गहलोत को यह पूरी जानकारी पहले से थी। पर्यवेक्षकों का अचानक आने की बात कहना गलत है।
पायलट की चुप्पी पर भी हैं सवाल
पार्टी के एक गुट का मानना है कि इन सबके बावजूद सचिन पायलट का गहलोत के आरोपों पर एक बार भी मुंह नहीं खोलना कई सवाल खड़े करता है। सचिन पायलट को भी यह पता है कि मानेसर की घटना को कांग्रेस आलाकमान भी आसानी से भूलने वाला नहीं है।
पायलट को यह भी पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी किसी भी सूरत में इस बात को भूलने वाले नहीं हैं। इसलिए ही वह कभी भी गहलोत की किसी बात का ना जवाब देते हैं ना ही प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।
वह इस बात से भली भांति वाकिफ हैं कि उनके प्रयास करने से अब कुछ नहीं होने वाला और अब आलाकमान ही उनकी अगली भूमिका तय करेगा। कांग्रेस सूत्रों का यहां तक कहना है कि पायलट की बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वापसी अब संभव नहीं लगती।
पायलट कैंप का 11 जून को शक्ति प्रदर्शन
पायलट समर्थक नेताओं को ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने का टारगेट दिए हैं। पायलट कैंप में अशोक गहलोत के हालिया हमले के कारण जबर्दस्त बेचैनी और नाराजगी है। इसलिए उन्होंने 11 जून को शक्ति प्रदर्शन करने की ठान ली है।
FAQ
- अशोक गहलोत कब से राजनीतिक जीवन में हैं, वे किन पदों पर रहे?
अशोक गहलोत 40 साल से राजनीतिक रुप से सक्रिय हैं। वह तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री, तीन बार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दो बार एआईसीसी महासचिव जैसे अहम पदों पर रहे हैं। - अशोक गहलोत ने ऐसा क्या बयान आया, जिससे वह चर्चा में हैं?
अशोक गहलोत सार्वजनिक रुप से सचिन पायलट की बगावत की याद दिलाते रहते हैं? इसी कड़ी में गहलोत ने दो दिन यह बयान दिया कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका गया। इसके लिए उनके खिलाफ साजिश रची गई। - क्या सचिन पायलट ने कांग्रेस में बगावत की थी?
सचिन पायलट पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे। वे अपनी उपेक्षा को लेकर सरकार से नाराज थे। इसके बाद जुलाई 2020 में पायलट अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे। इसी घटनाक्रम को सचिन पायलट की बगावत के रूप में देखा जाता है।
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FAQ
- अशोक गहलोत कब से राजनीतिक जीवन में हैं, वे किन पदों पर रहे?
अशोक गहलोत 40 साल से राजनीतिक रुप से सक्रिय हैं। वह तीन बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री, तीन बार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दो बार एआईसीसी महासचिव जैसे अहम पदों पर रहे हैं। - अशोक गहलोत का ऐसा क्या बयान आया, जिससे वह चर्चा में हैं?
अशोक गहलोत सार्वजनिक रुप से सचिन पायलट की बगावत की याद दिलाते रहते हैं? इसी कड़ी में गहलोत ने दो दिन यह बयान दिया कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका गया। इसके लिए उनके खिलाफ साजिश रची गई। - क्या सचिन पायलट ने कांग्रेस में बगावत की थी?
सचिन पायलट पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे। वे अपनी उपेक्षा को लेकर सरकार से नाराज थे। इसके बाद जुलाई 2020 में पायलट अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे। इसी घटनाक्रम को सचिन पायलट की बगावत के रूप में देखा जाता है।
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