इस साल टाइगर स्टेट एमपी में 55 बाघों की मौत, सुरक्षा पर सवाल
CHAKRESH | Dec 30, 2025, 16:02 IST
55 tiger deaths mp 2025
मध्य प्रदेश में 2025 में 55 बाघों की मौत हो चुकी है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। आज के Thesootr Prime में जानें इन बाघों के मौत की वजह...
तीन प्वाइंट में समझें पूरा मामला
- 2025 में मध्य प्रदेश में 55 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
- अस्वाभाविक कारणों से हुई इन मौतों में शिकार और करंट से मौतें प्रमुख वजह हैं।
- विद्युत बाड़े, शिकार और सड़क दुर्घटनाओं जैसे खतरे बाघों की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बने हुए हैं।
बिजली के झटके बने बाघों के लिए सबसे घातक खतरा
अब तक 55 बाघों की मौत: क्या यह पर्याप्त चेतावनी नहीं है?
यह स्पष्ट है कि बाघों की मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, चाहे वह विद्युत झटका हो, सड़क या रेल दुर्घटनाएं हों या फिर शिकार की घटनाएं। क्या यह मूकदर्शक वन विभाग की असफलता का प्रतीक नहीं है? सवाल ये है कि क्या वन विभाग तब जागेगा, जब सारे बाघ खत्म हो जाएंगे?
tiger mortality year 2025
| Tiger mortality for the year 2025 | ||
| State | Count | Percent |
| Madhya Pradesh | 55 | 33.1% |
| Maharashtra | 38 | 22.9% |
| Karnataka | 14 | 8.4% |
| Kerala | 13 | 7.8% |
| Assam | 12 | 7.2% |
| Tamil Nadu | 9 | 5.4% |
| Uttarakhand | 7 | 4.2% |
| Uttar Pradesh | 4 | 2.4% |
| Tamilnadu | 3 | 1.8% |
| Andhra Pradesh | 2 | 1.2% |
| Chhattisgarh | 2 | 1.2% |
| Odisha | 2 | 1.2% |
| Rajasthan | 2 | 1.2% |
| Karnatatka | 1 | 0.6% |
| Telangana | 1 | 0.6% |
| West Bengal | 1 | 0.6% |
बाघों की बढ़ती संख्या के साथ मौतों के आंकड़े भी चढ़े
किस साल कितने बाघों की मौत
साल 2022 - 43
साल 2023 - 45
साल 2024 - 46
साल 2025 - 55
tiger mortality
क्या राज्य वन विभाग और वन अधिकारियों की नींद टूटेगी?
बाघों की सुरक्षा: अभी या कभी नहीं!
MP senior journalist Abhilash Khandekar
मप्र के वरिष्ठ पत्रकार और बाघों पर काम कर रहे अभिलाष खांडेकर लगातार हो रही मौतों से चिंतित हैं। वे कहते हैं - यह साल बाघों के लिए दुखद रहा है। इतनी बड़ी संख्या में बाघों की प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारणों से हुई मौतें निश्चित रूप से चिंताजनक हैं। इससे यह भी साबित होता है कि तमाम दावों के बावजूद एमपी में बाघ तस्कर सक्रिय हैं। वन विभाग इनसे ठीक तरीके से निबट नहीं पा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कह रहे हैं कि हम बाघों के लिए खूब काम कर रहे हैं, मगर अभी भी बहुत कसावट लाने की जरूरत है। बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर मप्र वन्यप्राणी बोर्ड के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं।
Thesootr View: अभी नहीं तो कभी नहीं!
इस लिंक से देखें कहां कितने बाघों की मौत-
Thesootr Prime के इन कंटेंट को भी अवश्य पढ़ें...
भारत का मिडिल क्लास गायब? 10% अमीरों के पास 65% संपत्ति, रिपोर्ट में चेतावनी
टाक्सिक्स लिंक का खुलासा: नमक-चीनी में माइक्रोप्लास्टिक बना रहा भारत को बीमार
मध्यप्रदेश में 10 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित, धर्मेंद्र प्रधान के बयान से फिर बहस शुरू
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman