महिला आरक्षण लागू करने लोकसभा में हो सकती हैं 816 सीटें, 2029 चुनाव से लागू करने की तैयारी
CHAKRESH | Mar 24, 2026, 11:58 IST
womens reservation lok sabha
महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार कम से कम दो बिल लाने की तैयारी में है। इससे लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं। साल 2029 के चुनाव से यह कोटा लागू करने का लक्ष्य है। Thesootr Prime में आज समझते हैं कैसे बढ़ेगा संसद में महिला प्रतिनिधित्व…
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- संसद के मौजूदा सत्र में सरकार महिला आरक्षण के लिए कम से कम दो बिल लाने की तैयारी कर रही है।
- इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं।
- बढ़ी हुई 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाएंगी।
- 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की योजना है ताकि 2029 तक कोटा लागू हो सके।
- गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को विभिन्न दलों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।
महिला आरक्षण का नया प्लान
सरकार का मकसद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को एक तिहाई सीटों पर आरक्षण देना है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को मजबूती देगा। चार राज्यों के विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं, इसलिए यह कदम राजनीतिक रूप से भी अहम है।
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तो संसद में 543 की जगह 816 सीटें होंगी
बहुमत का आंकड़ा अभी 272 है। नई व्यवस्था में यह बढ़कर 409 हो जाएगा। लोकसभा की ताकत पांच दशकों में पहली बार बढ़ेगी। बता दें कि फिलहाल राज्यसभा और विधान परिषदों की सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
2011 जनगणना से होगा परिसीमन
सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार मौजूदा कानून की जनगणना वाली शर्त को हटाना चाहती है। एक sootr ने बताया, "सरकार 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से यह कोटा लागू करना चाहती है।" अगर सहमति बनाने में कुछ और दिन लगे तो बजट सत्र बढ़ाया जा सकता है या दोबारा बुलाया जा सकता है।
ग्राफ से समझिए मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सीटों का गणित
MP Delimitation Commission seats
Rajasthan Delimitation Commission seats
CG Delimitation Commission seats
उत्तर और दक्षिण दोनों की चिंता दूर
यानी जिन राज्यों में सीटें विषम संख्या में हैं, जैसे मध्य प्रदेश 29 और तमिलनाडु में 39, वहां परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) अनुपात के हिसाब से फैसला करेगा। दक्षिणी राज्यों को डर था कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद उनकी संसदीय ताकत कम हो जाएगी। इस प्रस्ताव में सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाकर यह चिंता दूर करने की कोशिश की गई है।
एससी-एसटी सीटें भी बढ़ेंगी
अमित शाह की बैठकें
एनडीए की बैठक में 22 सांसद मौजूद रहे। दूसरी बैठक में समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), बीजद (BJD - Biju Janata Dal) और वाईएसआर कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल हुए।
विपक्ष की मांग और आपत्तियां
साल 2023 में जब महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, तब कई विपक्षी सांसदों और महिला अधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की थी। उनका कहना था कि जनगणना और परिसीमन की शर्त की वजह से 2029 तक इसका लागू होना अनिश्चित हो गया था।
FAQ
- महिला आरक्षण बिल क्या है और इसे कब पास किया गया था?
महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में पास हुआ था। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई सीटें दी जाएंगी। लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी था। अब सरकार इस शर्त को बदलकर 2011 की जनगणना से परिसीमन करने पर विचार कर रही है ताकि 2029 के चुनाव से कोटा लागू हो सके। - लोकसभा की सीटें 816 क्यों की जा रही हैं?
सरकार महिला आरक्षण इस तरह लागू करना चाहती है कि मौजूदा पुरुष सांसदों को नुकसान न हो। इसलिए सीटें घटाने की बजाय 50 फीसदी बढ़ाई जाएंगी। मौजूदा 543 सीटों में 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी और ये नई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे लोकसभा की कुल सीटें 816 हो जाएंगी। यह व्यवस्था दक्षिणी राज्यों की उस चिंता को भी दूर करती है जिसमें उन्हें डर था कि जनसंख्या कम होने से उनका प्रतिनिधित्व घट जाएगा। - क्या सरकार के पास महिला आरक्षण बिल पास कराने का बहुमत है?
नहीं। संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। एनडीए के पास अभी इतना समर्थन नहीं है। इसीलिए गृहमंत्री अमित शाह विपक्षी और क्षेत्रीय दलों से अलग-अलग बात कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर ओबीसी आरक्षण की भी मांग कर रही हैं। सरकार बजट सत्र में बिल पास कराना चाहती है, लेकिन जरूरत पड़ी तो विशेष सत्र भी बुला सकती है।
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