डिप्टी कलेक्टर की गिरफ्तारी के बाद निगम कमिश्नर की बारी, घोटाले में शामिल एसडीएम-तहसीलदार, दलाल और करोबारी

Arun Tiwari | Feb 12, 2026, 16:45 IST
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भारतमाला परियोजना के मुआवजा घोटाले में 11 जिलों में जांच तेज हुई। डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद अब निगम कमिश्नर पर भी शिकंजा कस गया है।

News In Short

  • भारतमाला मुआवजा घोटाले पर अधिकारियों पर शिकंजा कस गया है।
  • डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद गिरफ्तार हो गए हैं।
  • रायपुर से विशाखापट्टनम तक कॉरिडोर बन रहा है।

News In Detail

रायपुर. डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और तहसीलदार लखेश्वर पसाद की गिरफ्तारी के बाद, भारतमाला घोटाले के मुख्य किरदार तत्कालीन एसडीएम और निगम कमिश्नर रहे निर्भय साहू पर शिकंजा कस गया है। ED और EOW के निशाने पर वे फरार अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिन्होंने भारतमाला प्रोजेक्ट में आने वाली जमीनों का खेल कर करोडों की बंदरबांट की है।

घोटाले के सिंडीकेट में एसडीएम,तहसीलदार,दलाल और कारोबारी शामिल रहे हैं। कुर्रे और लखेश्वर को EOW ने 20 फरवरी तक रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि अभी कई और नाम बाहर आएंगे। जांच एजेंसियों ने 11 जिलों में जांच तेज कर दी है। इन 11 जिलों से ही यह कॉरिडोर गुजर रहा है।

11 जिलों में हुआ जमीन घोटाला

भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में हुए बड़े घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने प्रदेश के 11 जिलों में एक साथ जांच शुरू कर दी है। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पटवारी, तहसीलदार, बैंक अधिकारी, कारोबारी और बिचौलियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।

राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संभागीय आयुक्तों से भारत माला परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण, सर्वे नंबर परिवर्तन, भूमि विभाजन और मुआवजा भुगतान से संबंधित डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट के आधार पर ही जांच एजेंसियों ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है । ईडी–ईओडब्ल्यू रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में प्रारंभिक जांच कर रही है।

कुर्रे अंदर अब निर्भय की बारी

भारत माला परियोजना से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। फरार चल रहे तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और एक नायब तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों अधिकारियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए 20 फरवरी तक रिमांड पर लिया है।

इस कार्रवाई को मामले की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। शशिकांत कुर्रे के बाद अब निर्भय साहू पर जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है। EOW को उम्मीद है कि गिरफ्तार दोनों अधिकारियों से कुछ और अहम सुराग हाथ लग सकते हैं। इस घोटाले से जुड़े कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।

भारतमाला घोटाला के करॅप्ट किरदार

  • निर्भय साहू, एसडीएम
  • लखेश्वर प्रसाद किरण नायब तहसीलदार
  • शशिकांत कुर्रे, तहसीलदार
  • जितेंद्र कुमार साहू, पटवारी
  • दीपक देव इंजीनियर, जल संसाधन विभाग
  • रोशन लाल वर्मा, आरआई
  • विजय जैन, कारोबारी
  • अमरजीत सिंह गिल, बैंक मैनेजर
  • हरजीत सिंह खनूजा, जमीन दलाल
  • उमा तिवारी, फर्जी मुआवजा लेने वाली आरोपी
  • दिनेश पटेल तत्कालीन पटवारी
  • लेखराम देवांगन तत्कालीन पटवारी
  • बसंती घृतलहरे तत्कालीन पटवारी
  • विनय कुमार गांधी, कारोबारी
  • हृदय लाल गिलहरे, ग्रामीण
  • योगेश कुमार देवांगन, ग्रामीण

अब आगे क्या

छत्तीसगढ़ भूमि अधिग्रहणमामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ। जमीन रिकॉर्ड में हेरफेर कर पात्र लाभार्थियों को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैंक डेटा में दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

जबकि वास्तव में 500 से ज्यादा खसरे जांच के दायरे में हैं। ईडी ने भी डॉक्यूमेंट्स की गंभीरता को देखते हुए 27 जनवरी को शिकायतकर्ताओं से जुड़े करीब दो हजार पेज के डॉक्यूमेंट जब्त कर जांच शुरू की है। जांच एजेंसी कुर्रे और लखेश्वर प्रसाद से भी रिमांड के दौरान कई और अहम सुराग निकालेंगी। इनके आधार पर भी आगे जांच की जाएगी।

Sootr Knowledge

भारत माला परियोजना के अंतर्गत रायपुर से विशाखापट्टनम तक लगभग 463 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। इसमें से करीब 124 किलोमीटर सड़क छत्तीसगढ़ से होकर गुजरती है। इसी कॉरिडोर में बड़ी मात्रा में कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया, जहां मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए।

धमतरी जिले के चंदन गांव निवासी कृष्ण कुमार साहू ने 8 अगस्त 2022 को राज्य शासन से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी भूमि के मूल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर मुआवजा फर्जी सर्वे नंबरों पर जारी कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर एसडीएम, नायब तहसीलदार और पटवारी से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद मामला उच्च स्तर तक पहुंचा।

Sootr Important Points

  • भारत माला मुआवजा घोटाले में ईडी-ईओडब्ल्यू की कार्रवाई तेज, छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में एक साथ जांच शुरू की गई है।
  • भूमि अधिग्रहण के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है- सर्वे नंबर बदले गए, जमीन को कागजों में छोटे टुकड़ों में बांटकर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया।
  • जांच में 500 से अधिक खसरों में हेरफेर और करीब 43 करोड़ के घोटाले में 78 करोड़ का भुगतान दिखाने के सबूत मिले हैं।
  • इस मामले में एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी, बैंक अधिकारी, कारोबारी और जमीन दलाल सहित कई लोग आरोपी बनाए गए हैं, कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
  • धमतरी के किसान की शिकायत से घोटाले का खुलासा हुआ, ईडी ने करीब 2000 पेज दस्तावेज जब्त कर पूछताछ शुरू कर दी है।

निष्कर्ष

राजस्व विभाग के अधिकारी,कर्मचारी,दलाल और करोबारियों के सिंडीकेट ने मिलकर जमीनों का खेला किया और करोड़ों कमाए। जमीनों के असली हकदार किसान मुआवजे के लिए भटकते रहे। जांच में सामने आया है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान वास्तविक भू-स्वामियों के बजाय अन्य लोगों के नाम पर मुआवजा जारी किया गया। कई मामलों में भूमि के सर्वे नंबर बदले गए, जमीन को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में दिखाया गया और कृत्रिम विभाजन कर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई।

भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर तक की भूमि पर अधिक दर से मुआवजा दिया जाता है, जबकि इससे अधिक क्षेत्रफल होने पर दर कम हो जाती है। इसी नियम का दुरुपयोग करते हुए बड़ी जमीनों को रिकॉर्ड में छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया। जहां एक एकड़ भूमि पर लगभग 20 लाख रुपये का मुआवजा बनता था, वहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजे की राशि करोड़ों तक पहुंचा दी गई।

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