गुमशुदा बच्चों के मामले में एमपी दूसरे और छत्तीसगढ़ छटवें नंबर पर, केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा
Arun Tiwari | Mar 09, 2026, 16:20 IST
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केंद्र सरकार की मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल पहले और मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ छठे और राजस्थान आठवें नंबर पर है।
Raipur. केंद्र सरकार की मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान की चिंता बढ़ाने वाली है। मध्यप्रदेश गुमशुदा होने वाले बच्चों की रिपोर्ट में दूसरे नंबर पर है जबकि छत्तीसगढ़ का नंबर छटवां हैं। वहीं राजस्थान का नंबर आठवां है।
लापता बच्चों की सूची में पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है। पिछले एक साल में 33577 बच्चे गायब हुए जिनमें से 7777 बच्चे अब तक नहीं मिले हैं। मध्यप्रदेश में यह संख्या 1 हजार से ज्यादा है। छत्तीसगढ़ में 400 तो राजस्थान में करीब ढाई सौ बच्चे अब तक नहीं मिले हैं।
मध्यप्रदेश :
लापता - 4256
इतने मिले - 3197
अब तक नहीं मिले - 1059
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छत्तीसगढ़ :
लापता - 982
इतने मिले - 582
अब तक नहीं मिले - 400
राजस्थान
लापता - 745
इतने मिले - 499
अब तक नहीं मिले - 246
छत्तीसगढ़ में बच्चों के गायब होने के मामले (Missing Children Report) कुछ जिलों में ज्यादा सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा जिला इस मामले में पहले नंबर पर है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों में लापता बच्चों की संख्या अधिक दर्ज की गई है।
लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से अब तक 559 बच्चों को खोजकर उनके परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। बरामद किए गए बच्चों में जांजगीर जिले के बच्चों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे औद्योगिक और बड़े शहरों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक है। कई बार इन परिवारों के बच्चे भटककर अपने घर से अलग हो जाते हैं और बिना सूचना के दूसरे शहरों तक पहुंच जाते हैं।
इसके अलावा मानव तस्करी भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। तस्कर गिरोह बच्चों को बड़े शहरों में ज्यादा पैसे या अन्य प्रलोभन देकर अपने साथ ले जाते हैं और बाद में उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए कई बच्चों ने इस तरह के मामलों का खुलासा किया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक लापता होने वाले बच्चों में 14 से 17 वर्ष की उम्र के किशोर-किशोरियों की संख्या ज्यादा है। इनमें भी लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में अधिक पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर-नगर हवेली में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
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यह पूरी रिपोर्ट राज्यों की सरकारों और पुलिस प्रशासन के लिए चिंता और चिंतन दोनों का विषय है। किशोर बच्चों में खासकर लड़कियों की तस्करी प्रशासन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। सूत्र कहते हैं कि कई मामलों में लड़कियों को शादी के लिए ले जाया जाता है।
शहरों में बड़े घरों में घरेलू काम के लिए भी गांवों की लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस की रिपोर्ट में यह बात भी सामने आती है कि गायब होने वाले बच्चे ज्यादातर अपनी पहचान वालों के साथ ही निकले थे जो बाद में लापता हो गए।
लापता बच्चों की सूची में पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है। पिछले एक साल में 33577 बच्चे गायब हुए जिनमें से 7777 बच्चे अब तक नहीं मिले हैं। मध्यप्रदेश में यह संख्या 1 हजार से ज्यादा है। छत्तीसगढ़ में 400 तो राजस्थान में करीब ढाई सौ बच्चे अब तक नहीं मिले हैं।
यह है एमपी,छत्तीसगढ़ और राजस्थान की स्थिति :
लापता - 4256
इतने मिले - 3197
अब तक नहीं मिले - 1059
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छत्तीसगढ़ :
लापता - 982
इतने मिले - 582
अब तक नहीं मिले - 400
राजस्थान
लापता - 745
इतने मिले - 499
अब तक नहीं मिले - 246
कुछ जिलों में ज्यादा मामले :
लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से अब तक 559 बच्चों को खोजकर उनके परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। बरामद किए गए बच्चों में जांजगीर जिले के बच्चों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।
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तस्करी भी बड़ी वजह:
इसके अलावा मानव तस्करी भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। तस्कर गिरोह बच्चों को बड़े शहरों में ज्यादा पैसे या अन्य प्रलोभन देकर अपने साथ ले जाते हैं और बाद में उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए कई बच्चों ने इस तरह के मामलों का खुलासा किया है।
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गायब होने वालों में 14 से 17 साल के बच्चे ज्यादा:
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निष्कर्ष :
शहरों में बड़े घरों में घरेलू काम के लिए भी गांवों की लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस की रिपोर्ट में यह बात भी सामने आती है कि गायब होने वाले बच्चे ज्यादातर अपनी पहचान वालों के साथ ही निकले थे जो बाद में लापता हो गए।
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