सिवनी हवाला कांड: आरोपी वीरेंद्र दीक्षित को हाईकोर्ट से मिली जमानत

Neel Tiwari | Feb 07, 2026, 21:04 IST
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Seoni Hawala Scam
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मध्य प्रदेश के सिवनी हवाला लूट कांड में हाई कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत दी। मामले के सह आरोपी वीरेंद्र दीक्षित को जस्टिस देवनारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने सशर्त जमानत दी।

News in short

  • सिवनी हवाला लूट कांड में सह-आरोपी वीरेंद्र दीक्षित को हाई कोर्ट से जमानत।
  • जस्टिस देवनारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने दी जमानत।
  • अभियोजन के पास मुख्य साक्ष्य सिर्फ कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट्स।
  • कोर्ट ने कहा डिजिटल चैट्स मात्र से गंभीर अपराध में संलिप्तता साबित नहीं।
  • 50 हजार के मुचलके और एक जमानतदार पर सशर्त रिहाई का आदेश।

News in detail

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में सामने आए बहुचर्चित हवाला लूट कांड में हाईकोर्ट ने सह-आरोपी वीरेंद्र दीक्षित को बड़ी राहत दी है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए आवेदक की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।

यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 483 के तहत दायर किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में ट्रायल लंबा चलने की संभावना है और आवेदक लंबे समय से जेल में बंद है।



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पहली जमानत याचिका हो चुकी थी वापस

कोर्ट को बताया गया कि वीरेंद्र दीक्षित की पहली जमानत याचिका 15 दिसंबर 2025 को वापस ले लिए जाने के कारण खारिज हो गई थी। इसके बाद वह लगातार 18 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में था।

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कैसे हुआ सिवनी हवाला कांड?

मामला 9 अक्टूबर 2025 की दरमियानी रात का है। अभियोजन के अनुसार, सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक क्रेटा कार (MH-13-EK-3430) को रोका। कार में सवार लोग कथित तौर पर हवाला व्यापारी सोहनलाल परमार के कर्मचारी थे, जो सतना और कटनी से करीब 2 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए लेकर जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस टीम ने इस रकम में से 1 करोड़ 45 लाख रुपए निकाल लिए और उसे तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे के कार्यालय की अलमारी में रख दिया गया।

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शिकायत के बाद खुला था पूरा मामला

जब इस घटना की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंची, तो जांच शुरू की गई। जांच में अलमारी से रकम बरामद हुई, जिसके बाद लखनवाड़ा थाना में अपराध क्रमांक 473/2025 दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। जांच के बाद चार्जशीट पेश की गई।

कॉल रिकॉर्ड और चैट्स बने दीक्षित के खिलाफ आधार

वीरेंद्र दीक्षित को कॉल डिटेल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट्स के आधार पर आरोपी बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि 8 और 9 अक्टूबर 2025 के बीच दीक्षित और मुख्य आरोपी पूजा पांडे के बीच 53 बार बातचीत हुई थी। सरकारी वकील ने कहा कि व्हाट्सएप मैसेज में गलत सूचना नहीं थी। "जल्दी करो, थोड़ा जल्दबाजी दिखाओगे तो काम हो जाएगा" जैसे शब्दों का प्रयोग उकसावे की ओर इशारा करता है।

बचाव पक्ष की दलील पारिवारिक कारणों से बातचीत

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने अभियोजन के तर्कों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पूजा पांडे और वीरेंद्र दीक्षित की पत्नी आपस में सगी बहनें हैं। घटना के समय पूजा पांडे का बीमार बेटा और उनकी सास आवेदक के घर पर ही मौजूद थे। ऐसे में पारिवारिक हालचाल के लिए बातचीत होना स्वाभाविक था, जिसे आपराधिक षड्यंत्र नहीं माना जा सकता।

डिजिटल चैट्स काफी नहीं - HC

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आवेदक के खिलाफ मुख्य साक्ष्य केवल कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट्स हैं। वह न तो घटना स्थल पर मौजूद था और न ही उसके मोबाइल से कोई अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। कोर्ट ने माना कि केवल डिजिटल चैट्स के आधार पर लूट या डकैती जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्तता सिद्ध करना पर्याप्त नहीं है।

चार्जशीट दाखिल, ट्रायल में लगेगा समय

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और ट्रायल पूरा होने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में आवेदक को अनिश्चित काल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने जमानत देना उपयुक्त माना।

जमानत के साथ कड़ी शर्तें

हाईकोर्ट ने वीरेंद्र दीक्षित को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और एक विलायक जमानतदार की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी अभियोजन साक्षी से संपर्क नहीं करेगा और न ही उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करेगा। बिना न्यायालय की अनुमति के वह देश से बाहर भी नहीं जा सकेगा। उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 480(3) की सभी शर्तों का पालन करना होगा।

13 पुलिस अधिकारियों पर चार्जशीट, लेकिन…

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इस मामले में 13 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। लेकिन कुछ अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति अब तक प्राप्त नहीं हो सकी है। यह पहलू आगे की कानूनी कार्रवाई और ट्रायल के दौरान अहम भूमिका निभा सकता है।

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दीक्षित के लिए खुला जेल से बाहर आने का रास्ता

इस आदेश के साथ ही सिवनी के इस बहुचर्चित हवाला कांड में आरोपी बनाए गए वीरेंद्र दीक्षित की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी है और आगे कोर्ट के समक्ष कई अहम सवालों पर निर्णय होना बाकी है।

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