राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर! जिलाध्यक्षों की रायशुमारी में फैल रही रार
Nitin Kumar Bhal | Oct 09, 2025, 12:17 IST
Photograph: (TheSootr)
राजस्थान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया में गुटबाजी और विरोध बढ़ रहे हैं। कार्यकर्ताओं की राय और संवाद की कमी से माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
Jaipur. राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) का संगठन सृजन अभियान (Organization Creation Campaign) अब चर्चा का विषय बन गया है। यह प्रक्रिया, जो शुरू में उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी, अब एक गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन (Congress District President Selection) के इस अभियान में गुटबाजी और विरोध के स्वर स्पष्ट रूप से सुनाई देने लगे हैं। यह प्रक्रिया अब रायशुमारी से अधिक ‘रार’ (Chaos) बन गई है।
यह खबर भी देखें...
राजस्थान में एमबीएम यूनिवर्सिटी का बड़ा कारनामा, छात्रों के 100 में से आ गए 133 नम्बर
कांग्रेस पार्टी की जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया में अब केवल नेताओं के भाषणों और नारेबाजी की गूंज सुनाई देती है। एआइसीसी (AICC) के पर्यवेक्षक, जो इस प्रक्रिया में दिशा देने के लिए भेजे गए हैं, स्थानीय दिग्गज नेताओं को बोलने का मौका दे रहे हैं। इस प्रकार की स्थिति में, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के वर्चस्व के कारण संवाद की बजाय दूरी और कटुता खुलकर सामने आ रही है। अजमेर, कोटा और झुंझुनूं जैसे जिलों में तो यह स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो चुकी है कि नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन तक की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इन जिलों में कार्यकर्ताओं के बीच में स्पष्ट मतभेद और गुटबाजी के कारण स्थिति और भी जटिल हो रही है।
यह खबर भी देखें...
भाजपा सरकार पर बरसे अशोक गहलोत, जानें जल जीवन मिशन को लेकर लगाए क्या आरोप
यह खबर भी देखें...
रणथंभौर में इलाके के लिए मां रिद्धि से भिड़ी बेटी मीरा, जानें कौन जीता, कौन हारा
कांग्रेस के पर्यवेक्षक दावा करते हैं कि वे व्यक्तिगत बातचीत के जरिए कार्यकर्ताओं से सुझाव ले रहे हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश चर्चाएं केवल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच ही सीमित रहती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है, क्योंकि उनकी राय को सही तरीके से सुना नहीं जा रहा है।
यह खबर भी देखें...
राजस्थान में धर्मांतरण अब अपराध, राज्यपाल ने दी विधेयक को मंजूरी, जानें क्या है कानून
इस पूरी प्रक्रिया के बीच, एआइसीसी (AICC) ने प्रदेश में नियुक्त 30 पर्यवेक्षकों में से तीन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में बदलाव किया है। यह बदलाव चित्तौड़गढ़, झालावाड़ और धौलपुर-करौली जिलों के पर्यवेक्षकों के लिए किया गया। इसे लेकर कांग्रेसजनों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक कारणों से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य इसे कार्यशैली और असंतोष का परिणाम मान रहे हैं।
यह खबर भी देखें...
राजस्थान मौसम अपडेट : 15 डिग्री तक पहुंचने लगा तापमान, जानें मौसम का पूरा हाल
कांग्रेस पार्टी के अंदर गुटबाजी और राजनीतिक जटिलताओं का यह उदाहरण कहीं ना कहीं पार्टी की कमजोरी को दिखाता है। राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के कारण कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास की कमी और असंतोष पैदा हो रहा है। यह स्थिति पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाती है। इस पूरे मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपने दृष्टिकोण को बदलने और कार्यकर्ताओं की राय को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, ताकि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत हो सके। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और तमाम बड़े नेताओं को एक जाजम पर बैठ पार्टी के हित में विचार करना होगा।
यह खबर भी देखें...
जेडीए में बिल्डरों के 100 करोड़ रुपए के चैक बाउंस, अब राशि वसूलने में अफसरों के छूटे पसीने
यह खबर भी देखें...
राजस्थान में एमबीएम यूनिवर्सिटी का बड़ा कारनामा, छात्रों के 100 में से आ गए 133 नम्बर
कांग्रेस की जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: संवाद से दूरियां
यह खबर भी देखें...
भाजपा सरकार पर बरसे अशोक गहलोत, जानें जल जीवन मिशन को लेकर लगाए क्या आरोप
जोधपुर में गहलोत का वर्चस्व
जोधपुर (Jodhpur) जिले में यह स्थिति और भी विशेष बन गई है। यहां के पार्टी कार्यकर्ता पर्यवेक्षकों से स्पष्ट रूप से कहते हैं कि "यहां तो अध्यक्ष का नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former CM Ashok Gehlot) ही तय करते हैं।" जोधपुर में यह चर्चा होने लगी है कि बड़े नेता मंच पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं, और जब बड़े नेता ही चयन प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, तो सामान्य कार्यकर्ता अपनी राय कैसे रख सकता है? यह स्थिति कांग्रेस पार्टी की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास की कमी को स्पष्ट रूप से दिखाती है।
रणथंभौर में इलाके के लिए मां रिद्धि से भिड़ी बेटी मीरा, जानें कौन जीता, कौन हारा
पर्यवेक्षकों की भूमिका: दावा और वास्तविकता
यह खबर भी देखें...
राजस्थान में धर्मांतरण अब अपराध, राज्यपाल ने दी विधेयक को मंजूरी, जानें क्या है कानून
तीन जिलों के पर्यवेक्षकों की नियुक्तियों में बदलाव
यह खबर भी देखें...
राजस्थान मौसम अपडेट : 15 डिग्री तक पहुंचने लगा तापमान, जानें मौसम का पूरा हाल
क्या राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी है ?
यह खबर भी देखें...
जेडीए में बिल्डरों के 100 करोड़ रुपए के चैक बाउंस, अब राशि वसूलने में अफसरों के छूटे पसीने
FAQ
- 1. राजस्थान में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया में क्या हो रहा है?
राजस्थान में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया में गुटबाजी और नारेबाजी के साथ विरोध की स्थिति बन गई है। पर्यवेक्षकों के द्वारा स्थानीय नेताओं को बोलने का मौका दिए जाने से यह स्थिति और बिगड़ी है। - 2. जोधपुर कांग्रेस में
अशोक गहलोत का क्या वर्चस्व है?
जोधपुर में कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिलाध्यक्ष का चयन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former CM Ashok Gehlot) ही तय करते हैं, जिससे अन्य कार्यकर्ताओं की राय दब जाती है। - 3. कांग्रेस पर्यवेक्षकों का जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया के बारे में क्या कहना है?
एआइसीसी (AICC) के पर्यवेक्षक दावा करते हैं कि वे व्यक्तिगत बातचीत के माध्यम से कार्यकर्ताओं से सुझाव ले रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश चर्चा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक ही सीमित रहती है। - 4. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया पर्यवेक्षकों के बदलाव से क्या संकेत मिलते हैं?
एआइसीसी (AICC) ने तीन जिलों के पर्यवेक्षकों की नियुक्ति बदल दी है, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और प्रशासनिक कारणों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। - 5. गुटबाजी का क्या असर कांग्रेस पार्टी पर पड़ेगा?
गुटबाजी कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि पार्टी के अंदर संवाद और विश्वास की कमी बनी रहती है, तो इससे पार्टी की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman