एमपी कांग्रेस में राज्यसभा सीट पर घमासान: एक सीट, कई दावेदार, क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ा
Ramanand Tiwari | Mar 22, 2026, 22:36 IST
mp congress
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा सीट पर घमासान जारी है। कई दावेदारों के बीच जोर-आजमाइश हो रही है। जातीय समीकरण, पार्टी असंतोष और क्रॉस वोटिंग के खतरे के बीच जीतू पटवारी ने खुद को दावेदार न होने की सफाई दी।
BHOPAL. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा सीट अब सियासी संघर्ष का केंद्र बन गई है। पार्टी पहले ही दो विधायकों के कम होने से कमजोर स्थिति में है। दावेदारों की भीड़ और जातीय समीकरणों की खींचतान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है क्या कांग्रेस समय रहते डैमेज कंट्रोल कर पाएगी?
कांग्रेस के पास राज्यसभा की सिर्फ एक सीट है, लेकिन दावेदारों की लंबी लाइन लग गई है। नेता खुलकर नहीं, लेकिन अंदरखाने अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। चिट्ठियां, लॉबिंग और सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे पार्टी के अंदर असंतुलन साफ नजर आने लगा है।
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हाल ही में प्रदेश प्रभारी के दौरे के दौरान विंध्य-रीवा क्षेत्र में ब्राह्मण चेहरे को राज्यसभा भेजने की मांग जोर पकड़ गई। दूसरी ओर, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग भी अपनी हिस्सेदारी का दावा कर रहे हैं। क्षत्रिय समाज भी पीछे नहीं है। यानी हर वर्ग अपनी हिस्सेदारी चाहता है, जिससे समीकरण और उलझ गए हैं।
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भाजपा ने अभी तक अपना कोई दावेदार सार्वजनिक नहीं किया है। इसे उसकी रणनीति माना जा रहा है। खामोशी से हालात पर नजर रखना और मौके पर वार करना। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि भाजपा कांग्रेस में फूट का फायदा उठाकर क्रॉस वोटिंग की स्थिति बना सकती है।
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कांग्रेस पहले ही दो विधायकों के कम होने से कमजोर है। ऐसे में अगर थोड़ी भी नाराजगी सामने आती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। जहां धुआं है, वहां आग भी होती है इस कहावत के बीच पार्टी की चिंता बढ़ना लाजमी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस ने अंदरूनी असंतोष को संभालने के लिए क्या प्लान बनाया है। अब तक कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है। यही वजह है कि अटकलों और आशंकाओं का बाजार गर्म है।
पिछले हफ्ते दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर अहम बैठक हुई। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इसमें शामिल हुए। बैठक के बाद पटवारी को खुद सामने आकर कहना पड़ा कि मैं राज्यसभा का दावेदार नहीं हूं।
पटवारी की सफाई यह इशारा करती है कि पार्टी के अंदर उनके नाम को लेकर भी चर्चाएं थीं। उन्होंने खुद को रेस से बाहर बताकर संदेश देने की कोशिश की कि विवाद को शांत किया जाए। लेकिन इससे यह भी साफ हुआ कि अंदरखाने कई स्तर पर खींचतान चल रही है।
कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। ऐसे में कई वरिष्ठ नेताओं को बड़े पद और जिम्मेदारियां नहीं मिल पाईं। राज्यसभा सीट उन्हें एक मौका दिख रही है सक्रिय राजनीति में बने रहने का।
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स्थिति साफ है एक सीट, कई दावेदार, जातीय दबाव और क्रॉस वोटिंग का खतरा। अगर कांग्रेस ने समय रहते संतुलन नहीं बनाया, तो यह सीट भी हाथ से जा सकती है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व किसे चुनता है और कैसे बाकी असंतोष को संभालता है।
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डैमेज कंट्रोल पर स्पष्ट रणनीति नहीं
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