16वां वित्त आयोग: एमपी को भारी नुकसान, कर्नाटक मालामाल
CHAKRESH | Feb 03, 2026, 16:37 IST
16th finance commission report mp loss karnataka gain
16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट में टैक्स रेवेन्यू बंटवारे के नए फॉर्मूले में कर्नाटक को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जबकि एमपी को भारी नुकसान हुआ। एमपी के अलावा सीजी और राजस्थान भी नुकसान में हैं। ऐसे में इन राज्यों को टैक्स रेवेन्यू का बहुत कम हिस्सा मिलेगा।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- 16th Finance Commission ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टैक्स रेवेन्यू बंटवारे का नया टैक्स फॉर्मूला तैयार किया है।
- इस फॉर्मूले में राज्यों की आर्थिक दक्षता यानी एफिशिएंसी और जीडीपी योगदान को ज्यादा महत्व दिया गया है।
- इससे कर्नाटक को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जबकि मध्य प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है।
- मध्य प्रदेश टैक्स रेवेन्यू: एमपी का हिस्सा 7.85% से घटकर 7.35% हो गया, जिससे राज्य को 7677 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।
- यही हाल राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश यानी पूरे उत्तर भारत का है।
16वां वित्त आयोग : नए फॉर्मूले में बदलाव
बता दें कि नए फार्मूले के तहत जीडीपी में योगदान को 10 प्रतिशत वेटेज दिया गया है। इसका असर कर्नाटक जैसे अधिक औद्योगिक और विकसित राज्यों पर पड़ा। कर्नाटक पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मजबूत है। इसके परिणाम स्वरूप कर्नाटक का हिस्सा 3.65% से बढ़कर 4.13% हो गया है। अब उसे 7 हजार 387 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलेंगे।
मध्यप्रदेश को झटका
इस कमी के कारण राज्य सरकार को अपने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए टैक्स बढ़ाने, कर्ज लेने या योजनाओं को धीमा करने का विकल्प हो सकता है। अगर राज्य अपनी राजस्व वसूली तेज नहीं करता, तो इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फंडिंग की कमी महसूस हो सकती है।
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कर्नाटक को क्यों मिला फायदा?
इसके अलावा, जनसंख्या और डेमोग्राफिक परफॉर्मेंस के वेटेज में भी कुछ बदलाव किया गया है, लेकिन असली फर्क "जीडीपी योगदान" को दिया गया है। इसने आर्थिक दक्षता को तरजीह दी और गरीब राज्यों को कम प्राथमिकता दी।
अब एमपी के लिए क्या विकल्प हैं?
सबसे कठिन, लेकिन प्रभावी उपाय यह है कि एमपी अपनी अर्थव्यवस्था की संरचना बदलें और उद्योग, सेवा क्षेत्र और कृषि के मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करे। अगर राज्य आगामी वर्षों में अपनी जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में तेज वृद्धि दिखाता है, तो अगले वित्त आयोग में इसे बेहतर स्कोर मिल सकता है।
कर्नाटक नहीं, इन राज्यों को भी बोनस
केरल की हिस्सेदारी 1.93 से बढ़कर 2.38 प्रतिशत कर दी गई है।
इसके साथ ही केरल को 6,975 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे।
गुजरात को 4,228 करोड़ और हरियाणा को 4,090 करोड़ रुपए का लाभ दिखा।
देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला महाराष्ट्र भी प्लस में रहा।
महाराष्ट्र का हिस्सा थोड़ा बढ़कर 6.44 प्रतिशत तक पहुंच गया।
यूपी, बंगाल और बिहार भी मार झेलेंगे
उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी में 4,884 करोड़ रुपए की कमी आई।
पश्चिम बंगाल को 4,701 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।
बिहार को भी 1,679 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा।
इन राज्यों में आबादी और पिछड़ापन दोनों बड़े मुद्दे हैं।
वित्त आयोग क्या है और क्या काम करता है?
16वीं वित्त आयोग की टीम में कौन कौन थे?
इस लिंक से देखें 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट-
FAQ
- 16वें वित्त आयोग का फॉर्मूला क्या है?
यह एक नया तरीका है, जिसमें राज्यों के आर्थिक प्रदर्शन, जीडीपी योगदान और विकास की गति को ध्यान में रखते हुए टैक्स रेवेन्यू का बंटवारा किया जाता है।
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