देसी ब्रांडः बंटवारे की आग से 1500 रुपए लेकर MDH के मसालों के बेताज बादशाह बनने तक का सफर
Manish Kumar | Sept 28, 2025, 16:00 IST
Photograph: (The Sootr)
Be इंडियन-Buy इंडियन कैंपेन के तहत जानिए कैसे पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे महाशय धर्मपाल गुलाटी ने 1947 के विभाजन के बाद संघर्ष करते हुए दिल्ली में MDH मसाला ब्रांड की शुरुआत की। तांगा चलाकर जमा किए पैसे से उन्होंने मसाला कारोबार शुरू किया।
Be इंडियन-Buy इंडियन: भारतीय देसी ब्रांड MDH की सफलता की कहानी भारतीय कारोबारी आत्मबल, संघर्ष और नई सोच की मिसाल है। महाशय धर्मपाल गुलाटी द्वारा स्थापित यह कंपनी आज देश-विदेश के किचन की शान बन चुकी है। यहां MDH के सफर की कहानी हर जरूरी पहलू के साथ बताई जा रही है।
![be indian-buy indian]()
पाकिस्तान के सियालकोट में, 27 मार्च 1923 को महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म हुआ। उनका परिवार एक आम पंजाबी व्यापारी परिवार था। उनके पिता महाशय चुन्नीलाल गुलाटी के पास “महाशियां दी हट्टी” नाम से देगी मिर्च और मसालों की दुकान थी। लेकिन, 1947 का विभाजन जबर्दस्त चुनौती लेकर आया - पूरी संपत्ति छीन गई, परिवार का उजड़ जाना, और बस एक उम्मीद लेकर नई दिल्ली पहुंचना। उस समय उनके पास मात्र 1500 रुपए थे।
![59a276a2-37d]()
परिस्थितियों ने उन्हें मजबूर किया कि वे घर-घर जाकर छोटी-मोटी चीजें बेचें, और परिवार के पालन-पोषण के लिए दिल्ली की सड़कों पर तांगा चलाने लगे। यह संघर्ष न सिर्फ आर्थिक था, बल्कि मानसिक भी; लेकिन धर्मपाल गुलाटी ने अपने भीतर की हिम्मत नहीं खोई।
![3d842905-696]()
दिल्ली पहुचकर, उन्होंने तांगा चलाकर 650 रुपए जमा किए और उसी पैसे से करोल बाग, अजमल खान रोड पर एक छोटी सी दुकान (लकड़ी का खोखा) खरीदी। इसी “महाशियां दी हट्टी” (MDH) नाम से मसालों का कारोबार दोबारा शुरू किया। मसाला पिसाई का पारिवारिक अनुभव उनके साथ था, लेकिन भारतीय बाजार में पहले से स्थापित नामों और लोगों की घर का पिसा मसाला पसंद करने की सोच से मुकाबला आसान नहीं था।
शुरू में दुकान पर ग्राहकों की भीड़ नहीं लगती थी, धर्मपाल खुद मसाला पीसते, पैक करते और बेचते थे। पहली सफल टेस्ट मार्केटिंग के लिए उन्होंने अपने मसालों के छोटे पैकेट सैंपल रूप में घरों में बांटने का तरीका अपनाया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई, सुझाव और ग्राहक बढ़ने लगे। विज्ञापन के माध्यम से पहली बार नाम “महाशिया दी हट्टी” चर्चा में आया। ग्राहक जब दुकान पर दोबारा आने लगे, तो 1953 में चांदनी चौक में एक बड़ी दुकान खोली।
![cb1da93b-848]()
MDH की असली उड़ान 1959 में तब शुरू हुई जब धर्मपाल गुलाटी ने कीर्ति नगर में मसाले पीसने की अपनी पहली फैक्ट्री लगाई। तब तक वे खुद ही उत्पाद, मार्केटिंग और पैकेजिंग सब देख रहे थे। उनका सबसे बड़ा नवाचार यह था कि वे इस सोच को बदलने में सफल रहे कि पैक मसाला भी शुद्ध, ताजा और किफायती हो सकता है। 'असली मसाले सच-सच, MDH-MDH' जिंगल हर भारतीय घर की पहचान बन गया।
एमडीएच मसालेःभारत में बढ़ती मांग के साथ-साथ, उन्होंने विदेशों में भी कारोबार फैलाया। आज MDH की दर्जनों फैक्ट्रियां दिल्ली, पंजाब, राजस्थान के अलावा लंदन, दुबई और 100 से ज्यादा देशों में हैं। “देगी मिर्च”, “चना मसाला”, “पाव भाजी मसाला” जैसे 60 से ज्यादा उत्पाद एमडीएच के पास हैं। हर महीने करीब एक करोड़ पैकेट बिकने लगे। मार्केटिंग का बड़ा दायरा और टेलीविजन के माध्यम से ब्रांड की अपनी अलग छवि बनी।
![e3846611-7fa]()
वर्तमान में MDH भारत की दूसरी सबसे बड़ी मसाला ब्रांड है। इसका देश के ब्रांडेड मसाला मार्केट में 12% तक का हिस्सेदारी है। यह ‘एवरेस्ट’ जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर देता है। कंपनी ने 2022-23 में करीब 10-15 हजार करोड़ रुपए का मार्केट वैल्यू हासिल किया। MDH के 60 से ज्यादा प्रोडक्ट्स लगभग 100 देशों में बेचे जा रहे हैं।
हालांकि, हाल में MDH के कुछ उत्पादों में “पेस्टीसाइड और केमिकल” पाए जाने के आरोपों और कुछ देशों में अस्थायी बैन की खबरें आईं, लेकिन कंपनी ने इन आरोपों को हमेशा झूठा और निराधार बताया है, और गुणवत्ता की गारंटी लगातार दी है।
![440042ab-9db]()
MDH इंडिया की ट्रेडिशनल और पैक मसाला कंपनियों की अग्रणी पंक्ति में आज भी मजबूती से कायम है। FDMCG सेक्टर में इसकी पहचान टॉप ब्रांड्स में होती है। खास बात यह है कि पूरे ब्रांड की पहचान आज भी उनके विज्ञापन में धर्मपाल गुलाटी की अपनी मौजूदगी और भरोसे से जुड़ी हुई है। 94 वर्ष की उम्र में भी वे सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले CEO माने जाते थे, और आज भी MDH की ब्रांड वैल्यू पर उनकी छवि का सीधा असर है।
बीते वर्षों में “एवरेस्ट”, “बैद्यनाथ”, “पाटंजलि”, और “चिंग्स” जैसे ब्रांड्स बड़ी रेस में हैं, लेकिन “MDH” की ग्राहकों के बीच पारंपरिक विश्वास और स्थानीय स्वाद को लेकर अलग जगह है। यही वजह है कि दिल्ली, उत्तर भारत और खासकर NRI कम्यूनिटी की पहली पसंद आज भी MDH है।
![File:MDH spices logo.png - Wikimedia Commons]()
MDH की सफलता का मूल मंत्र है - गुणवत्ता, ईमानदारी और ग्राहकों से सीधा जोड़। महाशय धर्मपाल गुलाटी हमेशा कहते थे, “गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास से बढ़कर कुछ नहीं।” MDH ने तकनीक, पैकेजिंग और सप्लाई चेन में बदलाव तो किया, लेकिन मसालों की शुद्धता, स्वदेशी स्वाद और ग्राहकों से सीधा रिश्ता ही हमेशा सबसे ऊपर रखा।
महाशय धर्मपाल ने कारोबार का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में खर्च करना भी अपना मंत्र बनाया। उन्होंने कई स्कूल, अस्पताल और धर्मशालाएं बनाई। उनका मानना था- “मुनाफा कमाना जरूरी है, लेकिन समाज को लौटाना जरूरी है”।
![d4f756ce-2d1]()
MDH की कहानी से हर युवा, उद्यमी और कारोबारी यह सीख सकते हैं कि:
- संघर्ष या विषम दौर, बिजनेस की असली नींव रखता है। साहस और धैर्य से हालात बदले जा सकते हैं।
- घर का पुश्तैनी काम साधारण लगे, पर उसमें अगर नवाचार और समय के अनुसार बदलाव किए जाएं, तो वह वैश्विक ब्रांड बन सकता है।
- मार्केटिंग में अपनी अस्लियत, ईमानदारी और पहचान छिपाने की बजाय उसे अपना ब्रांड फेस बना लेना चाहिए।
- गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, सोशल मार्केटिंग और समर्पण के साथ भारतीय तथा वैश्विक बाजार में टिक सके हैं।
अंततः - “एमडीएच” सिर्फ मसालों का नाम नहीं, मेहनत और जज्बे की मिशाल है, जो हर किचन, हर स्वाद और हर घर का अटूट हिस्सा बन चुकी है।
देसी ब्रांडः कभी स्कूटर के लिए लगती थी लाखों की वेटिंग, बजाज ने कैसे खड़ी की 2,38,000 करोड़ का साम्राज्य
देसी ब्रांडः जानिए कैसे महाराजा के तोहफे से शुरू हुए मैसूर सैंडल सोप ने तय किया 1,788 करोड़ रुपए तक का टर्नओवर
देसी ब्रांडः जानिए 25 रुपए से शुरू हुए अमूल ने कैसे खड़ा किया 90,000 करोड़ का साम्राज्य
देसी ब्रांडः जानिए बोरोलीन ने कैसे जीता भारतीयों का दिल, आजादी के बाद क्यों फ्री बांटी थी 1 लाख ट्यूब्स?
देसी ब्रांडः जानिए कैसे हिमालया कंपनी ने किराए की जगह और मां के गहने गिरवी रखकर बनाई अपनी पहचान
देसी ब्रांड : साइकिल पर दवा बेचने से शुरू हुई डाबर, कैसे बनी भारत की टॉप-5 FMCG कंपनी, जानें अनसुनी कहानी
देसी ब्रांड : सिर्फ 50 पैसे में शुरू हुई थी Parle-G की कहानी, आज है 8600 करोड़ रुपए का साम्राज्य
देसी ब्रांड : दो दोस्तों ने नौकरी छोड़कर खड़ा किया इमामी, आज साढ़े तीन हजार करोड़ का है कारोबार
देसी ब्रांड : कभी एक कमरे में हुई थी बैद्यनाथ की शुरुआत, आज 500 करोड़ का है कारोबार
'द सूत्र' के महाअभियान Be इंडियन-Buy इंडियन का आगाज, सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया पोस्टर और लोगो
be indian-buy indian
कैसे हुई MDH की शुरुआत
59a276a2-37d
परिस्थितियों ने उन्हें मजबूर किया कि वे घर-घर जाकर छोटी-मोटी चीजें बेचें, और परिवार के पालन-पोषण के लिए दिल्ली की सड़कों पर तांगा चलाने लगे। यह संघर्ष न सिर्फ आर्थिक था, बल्कि मानसिक भी; लेकिन धर्मपाल गुलाटी ने अपने भीतर की हिम्मत नहीं खोई।
MDH ब्रांड की शुरुआती संघर्ष की कहानी
3d842905-696
दिल्ली पहुचकर, उन्होंने तांगा चलाकर 650 रुपए जमा किए और उसी पैसे से करोल बाग, अजमल खान रोड पर एक छोटी सी दुकान (लकड़ी का खोखा) खरीदी। इसी “महाशियां दी हट्टी” (MDH) नाम से मसालों का कारोबार दोबारा शुरू किया। मसाला पिसाई का पारिवारिक अनुभव उनके साथ था, लेकिन भारतीय बाजार में पहले से स्थापित नामों और लोगों की घर का पिसा मसाला पसंद करने की सोच से मुकाबला आसान नहीं था।
शुरू में दुकान पर ग्राहकों की भीड़ नहीं लगती थी, धर्मपाल खुद मसाला पीसते, पैक करते और बेचते थे। पहली सफल टेस्ट मार्केटिंग के लिए उन्होंने अपने मसालों के छोटे पैकेट सैंपल रूप में घरों में बांटने का तरीका अपनाया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई, सुझाव और ग्राहक बढ़ने लगे। विज्ञापन के माध्यम से पहली बार नाम “महाशिया दी हट्टी” चर्चा में आया। ग्राहक जब दुकान पर दोबारा आने लगे, तो 1953 में चांदनी चौक में एक बड़ी दुकान खोली।
MDH ब्रांड की सफलता की कहानी
cb1da93b-848
MDH की असली उड़ान 1959 में तब शुरू हुई जब धर्मपाल गुलाटी ने कीर्ति नगर में मसाले पीसने की अपनी पहली फैक्ट्री लगाई। तब तक वे खुद ही उत्पाद, मार्केटिंग और पैकेजिंग सब देख रहे थे। उनका सबसे बड़ा नवाचार यह था कि वे इस सोच को बदलने में सफल रहे कि पैक मसाला भी शुद्ध, ताजा और किफायती हो सकता है। 'असली मसाले सच-सच, MDH-MDH' जिंगल हर भारतीय घर की पहचान बन गया।
एमडीएच मसालेःभारत में बढ़ती मांग के साथ-साथ, उन्होंने विदेशों में भी कारोबार फैलाया। आज MDH की दर्जनों फैक्ट्रियां दिल्ली, पंजाब, राजस्थान के अलावा लंदन, दुबई और 100 से ज्यादा देशों में हैं। “देगी मिर्च”, “चना मसाला”, “पाव भाजी मसाला” जैसे 60 से ज्यादा उत्पाद एमडीएच के पास हैं। हर महीने करीब एक करोड़ पैकेट बिकने लगे। मार्केटिंग का बड़ा दायरा और टेलीविजन के माध्यम से ब्रांड की अपनी अलग छवि बनी।
आज बाजार में MDH की क्या स्थिति है?
e3846611-7fa
वर्तमान में MDH भारत की दूसरी सबसे बड़ी मसाला ब्रांड है। इसका देश के ब्रांडेड मसाला मार्केट में 12% तक का हिस्सेदारी है। यह ‘एवरेस्ट’ जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर देता है। कंपनी ने 2022-23 में करीब 10-15 हजार करोड़ रुपए का मार्केट वैल्यू हासिल किया। MDH के 60 से ज्यादा प्रोडक्ट्स लगभग 100 देशों में बेचे जा रहे हैं।
हालांकि, हाल में MDH के कुछ उत्पादों में “पेस्टीसाइड और केमिकल” पाए जाने के आरोपों और कुछ देशों में अस्थायी बैन की खबरें आईं, लेकिन कंपनी ने इन आरोपों को हमेशा झूठा और निराधार बताया है, और गुणवत्ता की गारंटी लगातार दी है।
ब्रांड MDH की मार्केट में पॉजिशन
440042ab-9db
MDH इंडिया की ट्रेडिशनल और पैक मसाला कंपनियों की अग्रणी पंक्ति में आज भी मजबूती से कायम है। FDMCG सेक्टर में इसकी पहचान टॉप ब्रांड्स में होती है। खास बात यह है कि पूरे ब्रांड की पहचान आज भी उनके विज्ञापन में धर्मपाल गुलाटी की अपनी मौजूदगी और भरोसे से जुड़ी हुई है। 94 वर्ष की उम्र में भी वे सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले CEO माने जाते थे, और आज भी MDH की ब्रांड वैल्यू पर उनकी छवि का सीधा असर है।
बीते वर्षों में “एवरेस्ट”, “बैद्यनाथ”, “पाटंजलि”, और “चिंग्स” जैसे ब्रांड्स बड़ी रेस में हैं, लेकिन “MDH” की ग्राहकों के बीच पारंपरिक विश्वास और स्थानीय स्वाद को लेकर अलग जगह है। यही वजह है कि दिल्ली, उत्तर भारत और खासकर NRI कम्यूनिटी की पहली पसंद आज भी MDH है।
MDH ब्रांड का मूल मंत्र
File:MDH spices logo.png - Wikimedia Commons
MDH की सफलता का मूल मंत्र है - गुणवत्ता, ईमानदारी और ग्राहकों से सीधा जोड़। महाशय धर्मपाल गुलाटी हमेशा कहते थे, “गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास से बढ़कर कुछ नहीं।” MDH ने तकनीक, पैकेजिंग और सप्लाई चेन में बदलाव तो किया, लेकिन मसालों की शुद्धता, स्वदेशी स्वाद और ग्राहकों से सीधा रिश्ता ही हमेशा सबसे ऊपर रखा।
महाशय धर्मपाल ने कारोबार का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में खर्च करना भी अपना मंत्र बनाया। उन्होंने कई स्कूल, अस्पताल और धर्मशालाएं बनाई। उनका मानना था- “मुनाफा कमाना जरूरी है, लेकिन समाज को लौटाना जरूरी है”।
इस कहानी से क्या सीखा जा सकता है
d4f756ce-2d1
MDH की कहानी से हर युवा, उद्यमी और कारोबारी यह सीख सकते हैं कि:
- संघर्ष या विषम दौर, बिजनेस की असली नींव रखता है। साहस और धैर्य से हालात बदले जा सकते हैं।
- घर का पुश्तैनी काम साधारण लगे, पर उसमें अगर नवाचार और समय के अनुसार बदलाव किए जाएं, तो वह वैश्विक ब्रांड बन सकता है।
- मार्केटिंग में अपनी अस्लियत, ईमानदारी और पहचान छिपाने की बजाय उसे अपना ब्रांड फेस बना लेना चाहिए।
- गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, सोशल मार्केटिंग और समर्पण के साथ भारतीय तथा वैश्विक बाजार में टिक सके हैं।
अंततः - “एमडीएच” सिर्फ मसालों का नाम नहीं, मेहनत और जज्बे की मिशाल है, जो हर किचन, हर स्वाद और हर घर का अटूट हिस्सा बन चुकी है।
FAQ
- MDH का फुल फॉर्म और इसका नाम कैसे पड़ा?
MDH का फुल फॉर्म है “महाशियां दी हट्टी”। इसका नाम सियालकोट (अब पाकिस्तान) की उस मूल दुकान के नाम पर पड़ा, जिसे धर्मपाल गुलाटी के पिता चलाते थे। - MDH के संस्थापक कौन हैं और उनकी कहानी क्या है?
MDH के संस्थापक महाशय धर्मपाल गुलाटी हैं, जिनका जन्म सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ और जिन्होंने विभाजन के बाद दिल्ली में तांगा चलाकर मुसीबतों से निकलकर, इस ब्रांड को वैश्विक पहचान दी। - फिलहाल MDH की मार्केट में क्या स्थिति है?
MDH भारत की दूसरी सबसे बड़ी पैक मसाला कंपनी है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 12% है। इसके उत्पाद 100+ देशों में बिक रहे हैं और दूसरे बड़े नामों को कड़ी टक्कर दे रहा है।
देसी ब्रांडः कभी स्कूटर के लिए लगती थी लाखों की वेटिंग, बजाज ने कैसे खड़ी की 2,38,000 करोड़ का साम्राज्य
देसी ब्रांडः जानिए कैसे महाराजा के तोहफे से शुरू हुए मैसूर सैंडल सोप ने तय किया 1,788 करोड़ रुपए तक का टर्नओवर
देसी ब्रांडः जानिए 25 रुपए से शुरू हुए अमूल ने कैसे खड़ा किया 90,000 करोड़ का साम्राज्य
देसी ब्रांडः जानिए बोरोलीन ने कैसे जीता भारतीयों का दिल, आजादी के बाद क्यों फ्री बांटी थी 1 लाख ट्यूब्स?
देसी ब्रांडः जानिए कैसे हिमालया कंपनी ने किराए की जगह और मां के गहने गिरवी रखकर बनाई अपनी पहचान
देसी ब्रांड : साइकिल पर दवा बेचने से शुरू हुई डाबर, कैसे बनी भारत की टॉप-5 FMCG कंपनी, जानें अनसुनी कहानी
देसी ब्रांड : सिर्फ 50 पैसे में शुरू हुई थी Parle-G की कहानी, आज है 8600 करोड़ रुपए का साम्राज्य
देसी ब्रांड : दो दोस्तों ने नौकरी छोड़कर खड़ा किया इमामी, आज साढ़े तीन हजार करोड़ का है कारोबार
देसी ब्रांड : कभी एक कमरे में हुई थी बैद्यनाथ की शुरुआत, आज 500 करोड़ का है कारोबार
'द सूत्र' के महाअभियान Be इंडियन-Buy इंडियन का आगाज, सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया पोस्टर और लोगो
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari