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Photograph: (The Sootr)
JAIPUR. राजस्थान में सरकारी जमीनों को अपना बताकर उन पर कब्जा करने के खेल में जुटी डिप्टी सीएम दीया कुमारी ( Diya Kumari) को जयपुर के जलेब चौक सपंत्ति के मामले में अदालत से झटका लगा है।
जिला एवं सैशन कोर्ट ने जलेब चौक के साइकिल स्टैंड सहित अन्य संपत्तियों पर कब्जे और मालिकाना अधिकार के 31 साल पुराने मामले में दीया कंमारी और उनके परिवार को राहत देने से इनकार कर दिया हैl डीजे रीटा तेजपाल ने इस मामले में अपर सिविल न्यायालय उत्तर, महानगर द्वितीय के 12 सितंबर 2024 के आदेश को बरकरार रखते हुए उसकी पुष्टि की है। उन्होंने यह आदेश दीया कुमारी से जुड़े महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट की अपील को खारिज करते हुए दिया।
अपील में सिविल न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए दीया कुमारी के ट्रस्ट ने कहा था कि इसी प्रकार के एक अन्य लेकिन समान मुद्दे पर अन्य कोर्ट ने ट्रस्ट के पक्ष में आदेश दिया था। इसलिए सिविल न्यायाधीश का आदेश खारिज किया जाए।
दीया का खेल, द सूत्र का खुलासा
द सूत्र डिप्टी सीएम दीया कुमारी के पद दुरुपयोग कर सरकारी जमीनों को हथियाने के खेल की परतों को लगातार खुलासा करता रहा है। दीया कुमारी ने अपने पद की गरिमा और मर्यादा को तार-तार कर जयपुर में सरकार की मालिकाना हक वाली बेशकीमती जमीन जलेब चौक पर अवैध कब्जा कर लिया है। इन स्थानों पर आम जनता के आवागमन पर रोक लगा दी है।
दीया कुमारी के ये अवैध कब्जे और अतिक्रमण जयपुर के आराध्य गोविन्द देवजी मंदिर, जंतर-मंतर वेधशाला और निजी संग्रहालय सिटी पैलेस से सटे जलेब चौक परिसर में हो रहा है। पूरे जलेब चौक परिसर में 24 घंटे ट्रस्ट से जुड़े वर्दीधारी गार्ड घूमते रहते हैं।
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इसलिए किया दावा खारिज...
सिविल कोर्ट ने यह कहते हुए ट्रस्ट का दावा खारिज किया था कि जब कोवेनेंट की शर्त के अनुसार जलेब चौक के रखरखाव का अधिकार ट्रस्ट को नहीं था तो उसने किस कानूनी अधिकार के तहत इस संपत्ति को लाइसेंस पर दिया।
ट्रस्ट ने दावे में कहा कि जयपुर रियासत के पूर्व शासक महाराजा सवाई मानसिंह बहादुर ने अपने जीवनकाल में ही साल 1959 में इस ट्रस्ट का गठन किया था। बाद में 1972 में ट्रस्ट के चेयरमैन सवाई भवानी सिंह ने ट्रस्ट को जलेब चौक सहित अन्य संपत्तियां दी थी। ट्रस्ट ने जलेब चौक की खाली जमीन को लाइसेंस पर अन्य लोगों को दिया था।
ये संपत्ति ट्रस्ट की निजी संपत्तियां हैं। इन पर राज्य सरकार, नगर निगम या अन्य सरकारी विभागों का कोई अधिकार नहीं है। इस संपत्ति पर ट्रस्ट के लाइसेंसधारी थड़ी व टीनशेड लगाकर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं।
ट्रस्ट के दावे के जवाब में नगर निगम का कहना था कि जयपुर रियासत के राज्य सरकार में विलय के समय इसका सरकारी उपयोग करने के लिए कब्जा सरकार को दिया था। कोवेनेंट के आधार पर सरकार ही इसकी सार-संभाल कर रही है। जलेब चौक व इसके चारों ओर के भवन राज्य सरकार के कब्जे व अधिकार में हैं और ट्रस्ट का इस सम्पत्ति पर कोई अधिकार नहीं है l
खाली जमीनों पर बनाए अवैध पार्किंग स्थल
कानूनी लड़ाई के बीच दीया कुमारी और उनके परिवार की ओर से जलेब चौक की खाली जमीनों पर अवैध तरीके से ही पार्किंग स्थल बनाए जाने लगे।
यहां पर्यटकों के वाहनों की पार्किंग करवाकर अवैध वसूली करने के लिए जमीन को समतल कराया जा रहा है, वहीं टीनशेड के बड़े कियोस्क बना दिए गए हैं। डिप्टी सीएम दीया कुमारी के इन अवैध अतिक्रमण और अवैध पार्किंग स्थल पर सरकार और नगर निगम हेरिटेज पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं।
दीया कुमारी हैं ट्रस्ट की सचिव
अवैध कब्जे व पार्किंग का यह खेल दीया कुमारी का निजी संग्रहालय सवाई मानसिंह म्यूजियम ट्रस्ट (सिटी पैलेस) कर रहा है। राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी इस ट्रस्ट की सचिव और ट्रस्टी हैं। उनके ही रसूख के दम ओर ट्रस्ट के बोर्ड लगाकर पार्किंग स्थल बना दिए गए हैं। सरकार और नगर निगम की अनुमति के बिना सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग स्थल बनाना गैर कानूनी तो है ही, साथ ही आपराधिक कृत्य भी है।
ऐसे कहा जाने लगा जलेब चौक
जलेब फारसी भाषा से लिया गया शब्द है। इसका मतलब रक्षादल यानी कि सेना की परेड होता है। रियासतकाल में राजपरिवार के निवास के मुख्य द्वार पर सैनिक हर वक्त ड्यूटी करते थे। ऐसे में वहां सैनिकों की परेड भी होती रहती थी। ऐसे स्थान को जलेब कहा जाता था।
वर्ष 1727 में जयपुर की स्थापना के बाद राजपरिवार आमेर से सिटी पैलेस में शिफ्ट हो गए। उसके बाद से सिटी पैलेस के उस बाहरी हिस्से को जलेब चौक कहा जाने लगा, जहां राजा महाराजाओं का स्वागत सत्कार, मेहमानवाजी और सुरक्षा के लिहाज से परेड आदि होती थी। आमेर में भी राजपरिवार के रहने के समय भी वहां जलेब चौक हुआ करता था।
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