सरकारी जमीन हड़पने का खेल : दीया कुमारी के कारनामों पर भजन सरकार चुप क्यों, आखिर सहमति या कुछ और?

राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी एक के बाद एक लगातार कारनामे कर रही हैं। इनमें जमीनों का खेल सबसे अहम है। खास बात यह भी है कि उनके कारनामों पर भजनलाल सरकार ने चुप्पी साध रखी है।

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Jaipur. राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी के कारनामों पर भाजपा सरकार ने आंखें मूंद रखी हैं। वे और उनका ट्रस्ट जयपुर में एक के बाद एक सरकारी जमीनों पर कब्जे, अवैध पार्किंग स्टैंड के संचालन और सरकारी बंगलों को नहीं छोड़ने जैसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है, लेकिन प्रदेश की भजनलाल सरकार इन कारनामों पर कोई एक्शन नहीं ले रही है।

हैरानी की बात यह है कि दीया कुमारी का ट्रस्ट हेरिटेज नगर निगम के दो सरकारी गोदामों को खाली करवाकर उन पर कब्जा कर चुका है। कोर्ट में हारने के बावजूद राजधानी में जलेब चौक समेत अन्य संपतियों से कब्जा नहीं छोड़ने के मामले भी सामने आ चुके हैं।

'द सूत्र' डिप्टी सीएम के कारनामों का लगातार खुलासा कर रहा है। सरकारी जमीनों और संपत्तियों को हथियाने के इतने मामलों के बाद भी सरकार के मौन बने रहने से शहर की जनता में गुस्सा है।

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...और भी हो सकती है संपत्ति खुर्द-​बुर्द 

सूत्रों का कहना है कि दीया कुमारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से अरबों रुपए की और भी सरकारी संपत्तियों के खुर्द-बुर्द होने का अंदेशा है। सरकार की चुप्पी से लग रहा है कि बड़े स्तर पर इन कृत्यों को लेकर मिलीभगत है। 

गंभीर तथ्य यह है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद न तो जलेब चौक से सिटी पैलेस का कब्जा हटाया जा रहा है और ना ही कानूनी कार्यवाही की जा रही है। अगर यह सिलसिला रहा तो भविष्य में कई सरकारी सरकारी जमीनें हाथ से जा सकती हैं। 

दीया कुमारी के कृत्य न केवल पद की गरिमा के खिलाफ हैं, बल्कि स्पष्ट रूप से पद के दुरुपयोग का भी मामला है। 'द सूत्र' अब तक दीया कुमारी के कई मामलों को दीया तले अंधेरा सीरीज के जरिए उजागर कर चुका है। इनमें सरकार की बेबसी साफ दिखती है।

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केस 1 : हथरोई की जमीन… कोर्ट में हार गई भजन सरकार 

जयपुर के बीचों-बीच हथरोई क्षेत्र की सरकारी जमीन खसरा नंबर 227, 228 और 230 है। बरसों से यहां नर्सिंग काउंसिल, रेजिडेंसी स्कूल और सरकारी डिस्पेंसरी चल रही है, लेकिन अप्रैल, 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने यह जमीन दीया कुमारी के परिवार के नाम कर दी। इसके पीछे वजह यह रही कि भजनलाल सरकार कोर्ट में केस हार गई। 

सरकार का वकील कोर्ट ही नहीं पहुंचा। समय पर फीस जमा नहीं हुई। समय बढ़ाने का आग्रह नहीं किया गया और एएजी ऑफिस व जेडीए में आपसी तालमेल न के बराबर रहा। हाई कोर्ट के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती थी, लेकिन अब तक नहीं गई। फाइल लाल बस्ते में दबा दी गई है। जनता देख रही है कि कैसे लोकतंत्र के नाम पर खेल खेला जा रहा है। खेलने वाला कोई बाहरी नहीं, बल्कि सरकार के भीतर बैठे लोग ही हैं। 

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केस 2 : सिविल लाइंस के अरबों के बंगलों पर कब्जा

दीया कुमारी ने जयपुर स्थित सिविल लाइंस के बेशकीमती बंगला नंबर 15 और 16 पर कब्जा जमा रखा है। ये वही बंगले हैं, जो मुख्यमंत्री निवास के ठीक सामने हैं। इनकी कीमत अरबों रुपए में है, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि राज्य सरकार इन बंगलों को खाली कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।



बात शुरू होती है आजादी के बाद की, जब जयपुर रियासत का भारत में विलय हुआ था। उस वक्त सरकार और पूर्व शासक के बीच एक संधि हुई थी। इसमें साफ तौर पर लिखा गया कि सिविल लाइंस के बंगला नंबर 15 और 16 सरकारी संपत्ति हैं। इनका मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा। सरकार ही इनका रख-रखाव करेगी।

तत्कालीन परिस्थितियों के हिसाब से राजपरिवार के घरेलू अधिकारियों को इन बंगलों में रहने की इजाजत दे दी गई थी, लेकिन शर्त थी कि जब इनकी जरूरत न रहे तो राजपरिवार इन्हें खाली कर देगा। पर क्या हुआ? राजपरिवार ने इन बंगलों को खाली नहीं किया। इससे आगे बढ़कर अपने निजी दफ्तर खोल दिए। आज इन बंगलों में दीया कुमारी के परिवार के ऑफिस चल रहे हैं।

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केस 3 : जयगढ़ फोर्ट में सरकारी नियम, लेकिन निजी कमाई

जयगढ़ फोर्ट नाहरगढ़ सेंचुरी के भीतर आता है। यहां कॉमर्शियल गतिविधियां वर्जित हैं, लेकिन यहां वीआईपी पार्टियां, फिल्म शूटिंग, इवेंट, सब धड़ल्ले से चल रहा है। क्यों? क्योंकि यह फोर्ट जयगढ़ पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के पास है। यह ट्रस्ट सीधे दीया कुमारी के परिवार का है।

सूत्रों के मुताबिक, यहां से सालाना 10 करोड़ की कमाई होती है। टिकट, कैमरा शुल्क, इवेंट रेंटल… सब निजी खाते में जाता है। अब यहां रोपवे प्रोजेक्ट लाने की तैयारी है, जो पहले नाहरगढ़ को जोड़ने वाला था, अब बदलकर इसे आमेर-जयगढ़ कनेक्शन बनाया गया है। इसकी अनुमानित लागत 400 करोड़ रुपए है। यहां भी सवाल यही है कि निजी संपत्ति को सरकारी पैसों से क्यों चमकाया जा रहा है?

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केस 4 : जलेब चौक पर खुलेआम कर लिया कब्जा 

राजस्थान की डिप्टी सीएम के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने अपने पद की गरिमा और मर्यादा को तार-तार कर जयपुर में सरकार की मालिकाना हक वाली बेशकीमती जमीन जलेब चौक पर अवैध कब्जा कर लिया है। इन स्थानों पर जनता के आवागमन पर रोक लगा दी है। 

दीया कुमारी के ये अवैध कब्जे और अतिक्रमण जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर, जंतर-मंतर वेधशाला और निजी संग्रहालय सिटी पैलेस से सटे जलेब चौक परिसर में हो रहा है। पूरे जलेब चौक परिसर में 24 घंटे ट्रस्ट से जुड़े वर्दीधारी गार्ड घूमते रहते हैं। 

दीया कुमारी और उनके परिवार की ओर से जलेब चौक की खाली जमीनों पर अवैध तरीके से ही पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं। यहां पर्यटकों के वाहनों की पार्किंग करवाकर अवैध वसूली करने के लिए जमीन को समतल करने का काम जोरों पर है। वहीं टीनशेड के बड़े कियोस्क बना दिए गए हैं।

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केस 5 : क्या टैक्स चोरी करती हैं दीया कुमारी?

सवाल है कि दीया कुमारी क्या इनकम टैक्स की चोरी करती हैं? क्या वित्त मंत्री खुद सरकार को चूना लगा रही हैं? ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि आयकर विभाग ने दीया कुमारी पर शिकंजा कस दिया है। जमीनों के खेल और बेनामी निवेश की गुत्थियों में उलझी दीया कुमारी को आयकर विभाग ने सीधा नोटिस थमा दिया है। 

दिल्ली के महारानी बाग स्थित उनके पते पर भेजे गए इस नोटिस ने राजस्थान की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस नोटिस से दीया कुमारी का प्रदेश की जनता के बीच यह भ्रम टूटा है कि उनकी केंद्र में मजबूत पकड़ है। हालांकि नोटिस के बाद हाल ही में दीया कुमारी ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं से मुलाकात भी है, लेकिन बताया जाता है कि दिल्ली ने उनके इस आयकर नोटिस मामले से पल्ला झाड़ लिया है। केंद्र सरकार इस मामले में दीया कुमारी का कोई सहयोग करने की इच्छुक नहीं है। 

देश में यह संभवत: ऐसा विरला मामला है, जब भाजपा सरकार में वित्त महकमा संभाल रहीं डिप्टी सीएम को आयकर चोरी के संदेह में नोटिस थमाया गया है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 148 के तहत जारी यह नोटिस बताता है कि अगर विभाग को संदेह है कि आपने अपनी आय छुपाई है, तो कई साल बाद भी आपकी फाइल खोली जा सकती है यानी इस नोटिस के साथ ही दीया कुमारी की आयकर फाइल फिर से खुल गई है।

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केस 6 : रातों-रात दो सरकारी गोदाम पर कब्जा

जयपुर में डिप्टी सीएम दीया कुमारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव और पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जयपुर नगर निगम हेरिटेज के दशकों पुराने दो गोदामों को रातों-रात खाली करवा कर वहां सिटी पैलेस ट्रस्ट जयपुर के बोर्ड लगवा दिए गए। तीसरे गोदाम को खाली करवाने की भी तैयारी बताई जा रही है। 

रातों-रात दो सरकारी गोदाम पर दीया कुमारी ने किया कब्जा, खाली जमीन पर लगाए बोर्ड

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन पर दबाव डालकर उनकी निजी जमीनों पर भी बोर्ड गाड़ दिए गए हैं। ऐसा ही मामला जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर के प्रवेश द्वार से लगती कमल गट्टा कॉलोनी में सामने आया है, जहां पर जयपुर नगर निगम हेरिटेज के दशकों पुराने तीन गोदाम हैं। 

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दीया कुमारी ने अपने रसूखात और दबंगई का इस्तेमाल करते हुए रातों-रात दो सरकारी गोदामों को खाली करवाकर कब्जा जमा लिया है। अब तीसरे गोदाम को खाली करवाने का खेल चल रहा है। यह काम उनका ट्रस्ट दादागिरी के साथ कर रहा है। वहां भी स्थानीय लोगों व सिटी पैलेस ट्रस्ट की मनमानी व दबंगई को लेकर विवाद शुरू होने लगे हैं।

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